कर्मचारियों के विरोध के बावजूद निजी कंपनी ही उठाएगी कचरा, 1144 करोड़ रु. का प्रोजेक्ट पास

निजी कंपनी को डोर टू डोर कचरा कलेक्शन का ठेका नहीं दिया जाने की मांग के भारी विरोध को निगम ने नजर अंदाज कर दिया है। हालांकि पिछली जनरल हाउस की मीटिंग में कर्मचारियों की ओर से किए गए भारी रोष प्रदर्शन के वक्त निगम ने ये जवाब दिया गया था कि निगम ऐसा कोई काम नहीं करने वाला है। लेकिन वीरवार को मेयर कैंप ऑफिस में रखी गई एफएंडसीसी की मीटिंग में उसी प्रस्ताव को पास कर दिया गया। मीटिंग के दौरान 95 वार्डों में सफाई सेवकों को 800 रेहड़े देने का वर्क आर्डर भी जारी कर दिया गया है, प्रति रेहड़ा करीब 17 हजार रुपए में खरीदा जा रहा है। इसके अलावा बीएंडआर ब्रांच द्वारा 50 साल का लोन लेकर हल्का वाइज लगाए गए टेंडरों में से 5 टेंडरों को ओपन कर दिया गया और उसके वर्क आर्डर भी जारी कर दिए गए हैं। इसे अलावा 3 प्रस्ताव फेल ट्यूबवैल के बदले नए ट्यूबवैल लगाने, पार्कों की मेंटीनेंस के वर्क आर्डर जारी किए गए हैं। कैंप ऑफिस में मेयर इंद्रजीत कौर, सीनियर डिप्टी मेयर राकेश पराशर, डिप्टी मेयर प्रिंस जौहर और निगम कमिश्नर नीरू कत्याल गुप्ता की अगुवाई में एफएंडसीसी की मीटिंग रखी गई थी, इस दौरान 50 प्रस्ताव लाए गए, जबकि 5 टेबल एजेंडे के तौर पर पेश हुए। इन सभी प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई है। कचरे से बनाई जाएगी बिजली लुधियाना नगर निगम शहर के करीब 4.5 लाख रिहायशी, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूनिट्स से निकलने वाले कचरे के स्थायी समाधान की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाने जा रहा है। निगम 1144 करोड़ रुपए का इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (आईएसडब्ल्यूडएम) प्रोजेक्ट लेकर आ रहा है, जो पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर आधारित होगा। खास बात यह है कि इस पूरे प्रोजेक्ट में निगम की जेब से एक रुपया भी खर्च नहीं होगा, बल्कि निजी कंपनी सारा निवेश करेगी। नई कंपनी ताजपुर रोड डंप साइट पर ही प्रोसेसिंग प्लांट लगाएगी। यहां कचरे से बिजली उत्पादन किया जाएगा, एग्रीमेंट के तहत कंपनी को 8-8-8 साल की अवधि के लिए जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। जबकि ये पंजाब का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है, जो सिर्फ लुधियाना में लाया जा रहा है। पीपीपी मॉडल पर कंपनी की ये रहेगी जिम्मेदारी कलेक्शन से प्रोसेसिंग तक, मशीनरी-मैनपावर सब कंपनी की जिम्मेदारी 2028 के बाद 700 टन कचरे का क्या होगा, अभी कोई रोडमैप नहीं: नई कंपनी को 8 साल के लिए सिर्फ 500 टन कचरे की जिम्मेदारी दी जाएगी। बाकी 700 टन कचरे की प्रोसेसिंग कर रही दो कंपनियों का टेंडर 2028 में खत्म हो जाएगा। इसके बाद यह काम किसे मिलेगा, इस पर निगम के पास फिलहाल कोई ठोस योजना नहीं है। समय रहते फैसला न हुआ तो आने वाले वर्षों में संकट खड़ा हो सकता है। {कंपनी की ओर से सारा इंफ्रास्ट्रक्चर, मशीनरी और मैनपावर लगाया जाएगा। {शहर में 10 नए सेकेंडरी डंप प्वाइंट बनेंगे, जहां 30 स्टेटिक कंपैक्टर लगेंगे। {कचरा प्रोसेसिंग प्लांट तक पहुंचाने के लिए 20 हुक लोडर आएंगे। {95 वार्डों में डोर टू डोर कलेक्शन की पूरी मशीनरी कंपनी की होगी। {कलेक्शन से लेकर ट्रांसपोर्टेशन तक मैनपावर भी निजी कंपनी का रहेगा। {कचरा उठाने से लेकर प्रोसेसिंग तक सब कुछ संचालन कंपनी की होगी जिम्मेदारी {पीपीपी मॉडल के तहत चुनी कंपनी 95 वार्डों में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन करेगी। {सेकेंडरी डंप से मेन प्रोसेसिंग प्लांट तक ट्रांसपोर्टेशन करेगी। {कचरे की प्रोसेसिंग और निपटान की पूरी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

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