छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर तीसरे और अंतिम दिन बुधवार को अधिकारियों-कर्मचारियों ने धरना प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने नारेबाजी करते हुए एक विशाल रैली निकाली और मुख्यमंत्री के नाम 11 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन प्रशासन को सौंपा। इन मांगों में ‘मोदी की गारंटी’ को पूरा करना प्रमुख था। इस रैली में लगभग एक हजार से अधिक कर्मचारी शामिल हुए, जिनमें बड़ी संख्या में महिला कर्मचारी भी थीं। राज्य की भाजपा सरकार ने वर्ष 2023 के चुनाव में ‘मोदी की गारंटी’ नाम से जो घोषणा पत्र जारी किया था, उसमें किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया है। इसी असंतोष के चलते कर्मचारियों ने 29 से 31 दिसंबर तक तीन दिवसीय हड़ताल की। मांग पूरी न होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी तीन दिवसीय हड़ताल की समाप्ति पर, समस्त कर्मचारी नेताओं ने भाजपा सरकार को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि ‘मोदी की गारंटी’ पूरी नहीं की गई, तो कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जवाबदारी सरकार की होगी। सरकारी कार्यालयों में कामकाज रहा ठप इस तीन दिवसीय हड़ताल के कारण गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के सभी सरकारी कार्यालयों में कामकाज ठप रहा और स्कूलों में भी पढ़ाई प्रभावित हुई। सभी अधिकारी-कर्मचारी 1 जनवरी से अपने काम पर लौटेंगे। धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट किया कि महंगाई भत्ता (डीए) कर्मचारियों का अधिकार है और अधिकारों का हनन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 से अनियमित रूप से डीए दिए जाने के कारण राज्य के सभी कर्मचारियों, अधिकारियों और पेंशनभोगियों को लाखों रुपये का नुकसान हो चुका है।


