जयपुर में कला और संस्कृति से जुड़े संस्थानों की लगातार अनदेखी के विरोध में शहर के विभिन्न विधाओं से जुड़े कलाकारों ने सोमवार को संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद की। सबसे पहले रवीन्द्र मंच पर आयोजित चर्चा के दौरान कलाकारों ने अपनी पीड़ा साझा की और कला संस्थानों की उपलेक्षा पर खुलकर चर्चा की। कलाकारों ने ने कहा कि यह कोई औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि कलाकारों की चेतना, गरिमा और सांस्कृतिक उत्तरदायित्व का प्रतीक है। इसके बाद सभी कलाकार शांतिपूर्ण ढंग से रैली निकालते हुए जवाहर कला केंद्र पहुंचे, लेकिन वहां उस समय कोई भी अधिकारी नहीं मिला, ऐसे में वे किसी को ज्ञापन नहीं दे पाए। ऐसे में कलाकार काफी निराश और हताश नजर आए। कला संस्थानों की दयनीय स्थिति पर जताई चिंता वरिष्ठ रंगकर्मी नरेन्द अरोड़ा ने कहा कि रवीन्द्र मंच, जवाहर कला केंद्र, संगीत नाटक अकादमी, साहित्य अकादमी, ललित कला अकादमी सहित अन्य सांस्कृतिक संस्थान अत्यंत दयनीय स्थिति में पहुंच चुके हैं। इन संस्थानों के पास न तो पर्याप्त बजट है, न ही आवश्यक कर्मचारी और न ही रखरखाव की समुचित व्यवस्था। जो संस्थान कभी कला और कलाकारों की पहचान हुआ करते थे, वे आज उपेक्षा और अव्यवस्था का शिकार बन चुके हैं। रिनोवेशन के नाम पर रवीन्द्र मंच पर करोड़ों रुपए खर्च हो चुके हैं, लेकिन उसके बाद भी स्थिति बहुत खराब है, इस पर जांच होनी चाहिए।
तमाशा साधक दिलीप भट्ट ने कहा कि सभी जगह कलाकार निराश है, जेकेके से लेकर रवीन्द्र मंच पर कलाकारों की सुनवाई नहीं हो रही है। सरकार को कलाकारों की तरफ ध्यान देना चाहिए और कला के संरक्षण पर काम करना चाहिए।
राष्ट्रीय करणी सेना फिल्म एसोसिएशन राजस्थान के अध्यक्ष शकूर कमेरा ने कहा कि हर तरफ कलाकारों अनदेखी हो रही है, रवीन्द्र मंच की स्थिति सभी के सामने है। जवाहर कला केन्द्र से भी पिछले कुछ समय से कलाकारों के हितों की मांग की जा रही है। अब तक सरकार ने सुना नहीं, इसी का परिणाम है कि कलाकारों को फिर से एकत्रित होना पड़ा है। यदि अब भी कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो यह बड़ा आंदोलन बन जाएगा। आज हमारी पीड़ा सभी के सामने है, जब हम जेकेके प्रशासन को ज्ञापन देने पहुंचे, तो किसी भी कमरे में कोई अधिकारी मौजूद नहीं था। अब ऐसे में हमारी समस्याओं को कैसे निदान होगा।
रवीन्द्र मंच पर एकत्रित हुए कलाकारों को रंगकर्मी आरजे अमित और उज्जवल प्रकाश मिश्रा ने सभी कलाकारों को याद दिलाया कि 17 सितंबर 2025 को जवाहर कला केंद्र के गेट नंबर 5 पर हुआ शांतिपूर्ण एकत्रीकरण कलाकारों की एकता, सजगता और समझ का सशक्त उदाहरण था। उस एकजुट प्रयास का ही परिणाम था कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रशासन को संज्ञान लेना पड़ा और कुछ स्तर पर हलचल भी देखने को मिली। कलाकारों का कहना था कि आज एक बार फिर वही परिस्थितियां उत्पन्न हो गई हैं, जब उन्हें अपनी कला, अपने संस्थानों और अपने भविष्य की रक्षा के लिए संगठित होना पड़ा है। कलाकारों ने रखी यह मांग कलाकारों ने एक स्वर में कहा कि उनकी यह पहल पूरी तरह शांतिपूर्ण, सकारात्मक और संवाद आधारित है। उन्हें पूर्ण विश्वास है कि कलाकारों की यह संगठित आवाज कला और संस्कृति के क्षेत्र में निर्णायक बदलाव की दिशा तय करेगी। इस दौरान वरिष्ठ कलाकार माधव सिंह, अशोक आत्रेय, डॉ कुमार राजीव, गणेश साहू, जफर खान, वासुदेव भट्ट, डॉ अलका राव, श्याम रेड्डी, राजेन्द्र कुमार राजू, अमित शर्मा, उज्जवल मिश्रा, आसिफ शेर अली खान, राजीव मिश्रा, ओमप्रकाश सैनी, सुनील सोगण, गौरव त्रिपाठी, अजय शर्मा, ओमप्रकाश सैनी सहित कई नामचीन कलाकार मौजूद रहे।


