कलेक्टर गाइडलाइन इसी महीने जारी होने के आसार:रायपुर, बिलासपुर समेत कई जिलों में कलेक्टर गाइडलाइन रेट 10 से 100% तक बढ़ सकते हैं

राज्य के सभी जिलों में जल्द नई कलेक्टर गाइड लाइन जारी होगी। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई और अं​बिकापुर समेत कई जिलों में 10% से 100% तक रेट बढ़ाने की सिफारिश की जा रही है। 2025-26 के लिए कलेक्टर गाइडलाइन तय करने के सभी जिलों से 15 अप्रैल तक रिपोर्ट मंगाई गई है। इसके इसी महीने के आखिर तक जारी होने के आसार हैं। सूत्रों के मुताबिक राजधानी के 70 वार्डों में से करीब 24 में रेट 50% तक बढ़ाने की तैयारी है। इसके लागू होने पर आम आदमी के लिए प्लाट, फ्लैट, मकान और दुकान खरीदना महंगा हो जाएगा। जिलों से आई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2018-19 से जमीन की सरकारी कीमत नहीं बढ़ी है। इसमें 5 साल में रेट 30% तक कम भी रहे। इस वजह से सरकारी रेट और बाजार भाव में बड़ा अंतर आ गया है। हर शहर में जमीन की कीमत बेतहाशा बढ़ गई, लेकिन शासकीय दस्तावेजों में कीमत अब तक कम है। इस अंतर को खत्म करने के लिए ही नई गाइडलाइन जारी करने की तैयारी है। वैसे भी 2019-20 से कलेक्टर गाइडलाइन में कोई बदलाव नहीं किया गया है। लेकिन अफसरों का कहना है कि 2018-19 की कलेक्टर गाइडलाइन को भी यथावत रखा गया था। यही वजह है कि इस बार गाइडलाइन तय करने के लिए खासी मशक्कत की जा रही है। जिलों से प्राप्त रिपोर्ट को मूल्यांकन समिति परखेगी और अपनी सिफारिशें देगी। यही वजह है कि 2025-26 के लिए नई गाइडलाइन इस बार 1 अप्रैल के बजाय थोड़ी देरी से जारी होगी। रायपुर में असर… सेजबहार, सड्डू समेत आउटर में रेट बढ़ सकते हैं 1. सस्ते मकान भी महंगे हो जाएंगे: कलेक्टर गाइडलाइन बढ़ने के साथ ही आउटर में जमीन की कीमत बढ़ जाएगी। इसके बाद सेजबहार, सड्डू, कचना, संतोषीनगर, पचपेड़ीनाका, रिंग रोड, मठपुरैना, भाठागांव, कुम्हारपारा, शीतलापारा, ट्रांसपोर्ट नगर, सरोना, बीरगांव, चंदनीडीह, तरुण नगर, बोरियाकला, बोरियाखुर्द समेत कई इलाकों में भी जमीन-मकान खरीदना महंगा हो जाएगा। कलेक्टर गाइडलाइन कम होने की वजह से अभी इन जगहों पर 15 से 20 लाख रुपए में जमीन-मकान मिल जाते हैं। अब इनकी कीमत एक से तीन लाख रुपए तक बढ़ जाएगी। 2. रजिस्ट्री का खर्चा बढ़ जाएगा: किसी भी जमीन की रजिस्ट्री पर स्टांप ड्यूटी 5.5 फीसदी अदा करनी पड़ती है। महिलाओं को इसमें आधा फीसदी की छूट है। रजिस्ट्री के दौरान एक प्रतिशत पंचायत उपकर और एक प्रतिशत निगम ड्यूटी भी अदा करनी होती है। उदाहरण के तौर पर किसी व्यक्ति ने 20 लाख रुपए की जमीन खरीदी है तो उसे ई-स्टांप, रजिस्ट्री शुल्क और उपकर पर करीब 2 लाख रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। यानी कुल कीमत का 10 फीसदी। जमीन की सरकारी कीमत बढ़ने के बाद स्टांप शुल्क का खर्चा बढ़ेगा। रायपुर शहर में यहां भी रेट बढ़ाने की तैयारी: रायपुर में आउटर के साथ ही शहर में जयस्तंभ से कोतवाली चौक तक, टाटीबंध से रिंग रोड, महोबाबाजार, कोटा, स्टेशन रोड, गुढि़यारी, सदरबाजार, बैजनाथपारा, देवेंद्रनगर, डीडी नगर, शंकरनगर, मौदहापारा, कचना, अवंति विहार, रामसागरपारा, एमजी रोड, फाफाडीह, खम्हारडीह, खमतराई, सेजबहार, डूंडा, मुजगहन, बोरियाकला, माना, टेमरी समेत कई इलाकों में कलेक्टर गाइडलाइन 10 से 50 फीसदी तक बढ़ाने की तैयारी है। मध्यप्रदेश और तेलंगाना मॉडल का भी अध्ययन
पंजीयन विभाग की टीम ने हाल ही में मध्यप्रदेश और तेलंगाना के रजिस्ट्री मॉडल का अध्ययन किया है। मध्यप्रदेश में भी बाजार और सरकारी भाव में अंतर आने की वजह से 150% तक रेट बढ़ाए गए हैं। तेलंगाना के हर जिले में कलेक्टर गाइडलाइन औसतन 50% तक बढ़ाई गई है। जमीन की सरकारी कीमत बढ़ने के बाद भी रियल एस्टेट के कारोबार में उछाल आया। आवासीय, कमर्शियल या कृषि किसी भी जमीन की खरीदी-बिक्री प्रभावित नहीं हुई। यानी लोग जरूरत के अनुसार खरीदी-बिक्री करते ही आ रहे हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर भी अफसरों ने जमीन की कीमत बढ़ाने की अनुशंसा की है। कलेक्टर गाइडलाइन तय करने सभी जिलों से अनुशंसा मंगाई गई है। रिपोर्ट के आधार पर ही जमीन की सरकारी कीमत में परिवर्तन किया जाएगा। शासकीय और बाजार भाव के अंतर को खत्म करने जहां जरूरत होगी वहीं रेट बढ़ाएंगे। -ओपी चौधरी, वित्त मंत्री छत्तीसगढ़

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