कलेक्टर डॉ. इंद्रजीत यादव ने चिकित्सा विभाग की ट्रेनिंग प्रोग्राम का निरीक्षण किया, इस दौरान खुद को ट्रेनर की भूमिका में पेश कर स्वास्थ्य कर्मचारियों न केवल प्रेरित किया, बल्कि अपने अनुभव और व्यावहारिक उदाहरणों से प्रोत्साहित किया। डॉ. यादव बॉर्न हेल्थी प्रोग्राम के तहत एएनसी सेवाओं में एएनएम सीएचओ प्रशिक्षण के निरीक्षण के लिए आए थे। सेवा भावना से ही मिलती है सफलता डॉ. यादव ने सज्जनगढ़ ब्लॉक का उदाहरण देते हुए बताया कि एक समय जब यहां आशान्वित ब्लॉक प्रोग्राम शुरू हुआ था तो कई चुनौतियां सामने आई थी। लेकिन सेवा भावना और बेहतर समन्वय से यह ब्लॉक अब स्वास्थ्य सेवाओं में जिले में अग्रणी बन गया है। उन्होंने सभी चिकित्सा कर्मियों को यही संदेश दिया कि संकल्प, एकजुटता और कड़ी मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। एनिमिया की समस्या पर गहरी चिंता उन्होंने हेल्थ कर्मचारियों से संवाद किया, कहा जब संसाधन पर्याप्त हैं, तो फिर भी एनिमिया जैसी समस्याएं क्यों बनी हुई हैं? उन्होंने आधुनिक खानपान की आदतों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और पारंपरिक आहार जैसे चने, जौ और गुड़ को अपनाने की सलाह दी। संवाद से बढ़ेगी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता डॉ. यादव ने चिकित्साकर्मियों को लाभार्थियों से संवाद स्थापित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मरीज जब डॉक्टर या स्वास्थ्य कर्मी के पास आता है, तो उसे अपनापन महसूस होना चाहिए। जांच में जल्दबाजी करने के बजाय, सही प्रक्रिया अपनाने से ही सटीक निदान संभव है। हर प्रक्रिया के पीछे होती है ठोस वजह उन्होंने जांच के दौरान नियमों की सख्ती से पालना करने पर जोर दिया। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि लैंसेट टेस्ट हमेशा अनामिका उंगली पर किया जाता है, ताकि किसी भी संक्रमण का खतरा कम से कम हो। इसी तरह, ब्लड प्रेशर की जांच सही तरीके से करने से सटीक परिणाम मिलते हैं। सतत प्रयास से होगा बदलाव कलेक्टर ने चिकित्सा कर्मियों से अपील की कि वे केवल जांच और इलाज तक सीमित न रहें, बल्कि आमजन को जागरूक करने का भी कार्य करें। गांवों में समूह बनाकर स्वास्थ्य चर्चा करें और पहले लोगों की समस्याओं को सुनें, फिर समाधान सुझाएं। कलेक्टर ने आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वे समुदाय में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं। उनके लिए स्वास्थ्यकर्मियों को एक मार्गदर्शक की भूमिका निभानी चाहिए, जिससे बेहतर समन्वय बन सके।


