हिंदी साहित्य के छायावाद युग के प्रमुख स्तंभ व महान कवि-नाटककार महाकवि जयशंकर प्रसाद की जयंती के अवसर पर शासकीय लाहिड़ी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में कार्यक्रम का आयोजन कर उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों व प्राध्यापकों ने उनकी कविताओं के माध्यम से काव्यांजलि अर्पित कर उनके अमूल्य साहित्यिक योगदान को याद किया। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. आरती तिवारी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। शुभारंभ दीप प्रज्वलन व प्रसाद के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। बीए तृतीय वर्ष की छात्राओं करिश्मा, मधु व सिमरन ने महाकवि की प्रसिद्ध कविताओं का सुमधुर व प्रभावी पाठ प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। हिंदी विभाग के अतिथि शिक्षक डॉ. रामफल पाल, भागवत प्रसाद जांगड़े व गिरीश दास ने भी प्रसाद की रचनाओं का वाचन करते हुए उनके साहित्यिक अवदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने विशेष रूप से महाकाव्य कामायनी की चर्चा करते हुए बताया कि यह कृति मानव जीवन के मनोवैज्ञानिक व दार्शनिक पक्षों का अद्भुत चित्रण प्रस्तुत करती है। महाकवि जयशंकर प्रसाद की रचनाएं आज भी युवाओं को नैतिकता, संवेदनशीलता व आत्मचिंतन की प्रेरणा देती हैं। अंत में सभी ने उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।


