नेपोटिज्म राजनीति में आ सकता है। अभिनय में आ सकता है, किसी भी नौकरी के क्षेत्र में आ सकता है, मगर काव्य में नहीं। अगर कविता सिखाई जाती तो जिन्होंने हिंदी से पीएचडी की है वे सभी कवि होते। मेरे पिता आयुर्वेद में थे, उन्होंने दवा बनाना सिखाया, मैंने सीखा। पर कविता नहीं सिखाई। यह तो मैं अपने बेटे को भी नहीं सिखा सकता। हां, चाहो तो बकवास सिखा सकते हो। कविता लिखना-सुनाना सरस्वती का वरदान है… यह कहना था हास्य कवि पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा का। वे ग्वालियर में हुए अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करने के लिए आए थे। इस दौरान उन्होंने नेपोटिज्म, एआई के प्रभाव और हास्य में बढ़ती फूहड़ता से जुड़े दैनिक भास्कर के सवालों के जवाब बेबाक अंदाज में दिए… उपहास और फूहड़ता में अंतर समझिए… स्टैंडअप कॉमेडी में फूहड़ता है, बात वो हो, जिसे बाप-बेटी बैठकर साथ सुन सकें पहले तो हास्य और उपहास में अंतर समझिए। फूहड़ता स्टैंडअप कॉमेडी में है। मेरा मानना है कि कमाई नहीं है तो नंगे रहो, मगर नंगेपन की कमाई मत करो। स्टैंडअप कॉमेडी वाले नंगेपन की कमाई कर रहे हैं। पसंद या नापसंद करना आप पर निर्भर करना है। बात वो हो, जिसे बाप और बेटी बैठकर एक साथ सुन सकें। जब एक-दूसरे से आंखें चुराने लग जाएं तो क्या बात हुई। एआई हर फील्ड के लिए चुनौती बन रहा है। क्या कवि सम्मेलनों पर भी इसका कोई असर पड़ेगा?
– इससे साइबर क्राइम बढ़ने के सिवाय कुछ नहीं होगा। कवि सम्मेलनों पर इसका असर कतई नहीं पड़ेगा। एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, यह अपने आप में ही आर्टिफिशियल है ताे क्या प्रभाव डालेगा? यूट्यूब नेे भी हमें बोलने की आजादी है, भौंकने की नहीं। तनाव का कारण… आपका दूसरों के सुख से दुखी होना – तनाव क्या है, यह होता ही नहीं। तनाव इस बात का है कि मेरे सगे भाई की 4 कारें तकलीफ देती हैं, ये तनाव है। हम दूसरों के सुख से दुखी हैं। 40 साल पहले तो मेरे पास साइकिल थी, क्योंकि मैं अपने भाई के सुख से सुखी था। लालसा बढ़ीं हैं, इसलिए तनाव है। हमें बस काम करते रहना चाहिए, जहां रुक जाएं उसे मंजिल मान लेना चाहिए। धर्म और राजनीति का स्तर गिरा… 6-6 करोड़ की गाड़ियां, 8 हजार करोड़ की संपत्ति, किस बात के साधु राजनीति व धर्म का स्तर गिरा है। 6-6 करोड़ की गाड़ियों वाले साधु हैं, 8 हजार करोड़ की संपत्ति है, भाई फिर साधु किस बात का है तू? तू तो स्वादु है। किसी साधु ने देश के संकटकाल में, कोरोनाकाल में कोई पैसा दिया क्या? धर्म को हम निभा नहीं रहे हैं, धर्म को भुना रहे है, भून कर खा रहे हैं। आसाराम जेल से बाहर निकल आए तो फिर दो लाख आदमी उसके साथ होंगे। ‘नई पीढ़ी को संदेश है’, ऐसे संदेश देने वालों से बचकर रहें।


