कस्टम मिलिंग घोटाले के आरोपियों को नहीं मिलेगी प्रोत्साहन राशि:खाद्य विभाग ने सभी संभाग आयुक्त -कलेक्टर को जारी किया आदेश

छत्तीसगढ़ ऐसे राईस मिलर जिनके खिलाफ ACB- EOW में केस दर्ज है। उन्हें दूसरे किश्त की प्रोत्साहन राशि नहीं दी जाएगी। छत्तीसगढ़ खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग ने 10 जनवरी को यह आदेश जारी किया है। विभाग ने सभी संभागों और कलेक्टर और प्रबंधक संचालक को आदेश जारी किया है। जिसमें साल 2022-23 में राइस मिलों के लंबित प्रोत्साहन राशि की दूसरे किश्त देने के निर्देश दिए गए है। साथ ही EOW की जांच में आरोपी मिलर्स को भुगतान नहीं करनें कहा गया है। ये राइस मिलर्स को मिलेगी राशि प्रदेश के ऐसे राइस मिलर्स, जिनके खरीफ विपणन वर्ष 2022-23 में कस्टम मिलिंग के लिए उठाए गए धान की संपूर्ण कस्टम मिलिंग कर चावल जमा किया है। ऐसे राइस मिलर्स, जिनका खरीफ विपणन वर्ष 2022-23 में जमा किए जाने के लिए शेष कस्टम मिलिंग चावल की राशि का समायोजन अनुबंध के प्रावधानों के तहत 30 दिसंबर 2024 तक हो चुका है ऐसे लोगों को राशि का भुगतान किया जाएगा। इनके खिलाफ हुई है FIR 16 जनवरी 2024 को प्रवर्तन निदेशालय के प्रतिवेदन पर राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो रायपुर ने मार्कफेड के तत्कालीन प्रबंध संचालक मनोज सोनी ,तत्कालीन जिला मार्केटिंग ऑफिसर प्रीतिका पूजा केरकेट्टा, छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोसिएशन के तत्कालीन अध्यक्ष कैलाश रूंगटा, उपाध्यक्ष पारसमल चोपड़ा और कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर के खिलाफ FIR दर्ज की थी। क्या है कस्टम मिलिंग घोटाला? ED ने कस्टम मिलिंग स्कैम में मार्कफेड के पूर्व MD मनोज सोनी सहित 5 पर FIR दर्ज कराई है। आरोप है कि 140 करोड़ रुपए की अवैध वसूली की गई। इसमें अफसरों से लेकर मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी तक शामिल हैं। अलग-अलग राइस मिलर्स के द्वारा नागरिक आपूर्ति निगम और एफसीआई में कस्टम मिलिंग का चावल जमा किया जाता है। इस प्रकिया में भ्रष्टाचार कर प्रति क्विंटल के हिसाब से अवैध राशि की वसूली की गई। जांच में पता चला है कि एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर लेवी वसूलते और अफसरों को जानकारी देते। जिनसे रुपए नहीं मिलते उनका भुगतान रोक दिया जाता। अक्टूबर 2023 को छापा मारा था ED की टीम ने 20 अक्टूबर 2023 को ED ने छापा मारा था। ED ने अपने ऑफिशियल X अकाउंट पर लिखा कि, 20-21 अक्टूबर को मार्कफेड के पूर्व MD, छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स संगठन के कोषाध्यक्ष और कुछ सदस्यों, राइस मिलर्स और कस्टम मिलिंग से जुड़े लोगों के घर पर जांच की गई। चावल घोटाले से जुड़ी इस जांच में कई संदिग्ध दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और 1 करोड़ 6 लाख कैश मिला। ED ने इनकम टैक्स की शिकायत के आधार पर जांच शुरू की। इस जांच के बाद ED की स्थानीय टीम ने प्रतिवेदन दिया और उसके बाद एफआईआर हुई। फोर्टिफाइड राइस के भुगतान पर भी वसूली का आरोप राइस मिलर्स ने फोर्टिफाइड राइस का भुगतान करने पर पैसे मांगने का आरोप लगाया था। उनके अनुसार, केंद्र सरकार ने PDS के जरिए गरीबों को दिए जाने वाले अनाज की पौष्टिकता बढ़ाने के लिए फोर्टिफाइड राइस की मात्रा बढ़ाने का आदेश दिया था। सरकार के आदेश के मुताबिक, FCI और नागरिक आपूर्ति निगम में जमा होने वाले चावल में एक प्रतिशत फोर्टिफाइड राइस कर्नेल होना चाहिए। 99 किलो सामान्य चावल का पैमाना तय किया गया था। आरोप है कि इसमें कमीशनखोरी और घूसखोरी का खेल चला।

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