कांकेर शहर के मध्य स्थित गढ़िया पहाड़ में शुक्रवार सुबह भीषण आग लग गई, जो अब तक लगभग 5 एकड़ में फैल चुकी है। 8 घंटे बाद भी आग बुझाने का प्रयास जारी है। आग की चपेट में आकर सैकड़ों सागौन के पेड़ और वन्य जीवों के आशियाने जलकर राख हो गए। स्थानीय लोगों के मुताबिक, गढ़िया पहाड़ सागौन का प्रमुख केंद्र है। यहां हजारों की संख्या में सागौन के विशाल वृक्ष मौजूद हैं। तस्कर अक्सर पेड़ों को नीचे से काटकर धीरे-धीरे लकड़ी की चोरी करते थे। गर्मियों में जंगल में आग लगाकर लकड़ी की तस्करी को आसान बनाया जाता है। तेजी से फैल रही आग जानकारी के मुताबिक, आग सुबह 10 बजे जिला अस्पताल के पीछे से शुरू हुई है अब मेलाभाठा तक फैल चुकी है। सूखी पत्तियों के कारण आग तेजी से फैल गई। वन विभाग ने जगह-जगह संपर्क नंबरों के पैम्पलेट लगाए हैं, समय पर फायर ब्रिगेड के नहीं पहुंचने से ज्यादा नुकसान हुआ। महुआ बीनने वाले के आग लगाए जाने की आशंका आग लगने के कारण का अभी तक पता नहीं चल सका है। वन विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि कुछ लोग महुआ बीनने के लिए जमीन साफ करने के नाम पर आग लगाते हैं। हवा के कारण आग तेजी से फैलती है। विभाग रास्ता काटकर आग को नियंत्रित करने का प्रयास करता है। एरिया छोड़कर भागे जानवर स्थानीय ने बताया कि जंगल के पेड़ में कई पक्षी अपना घोंसला बनाकर अंडा दिए हुए थे, जिसमें से बच्चे भी बाहर आ गए थे। आग में पक्षी बच्चे समेत घोंसले में जलकर मर गए। गुफाओं में रहने वाले जानवर जंगल छोड़कर रहवासी इलाके में भागने लगे है। जंगल से शहर की तरफ जानवरों के आने से लोगो मे दहशत का माहौल बना हुआ है, जिससे बचने के लिए लोग घरों में ही रह रहे है। जंगल किनारे रहने वाले करते रहे निगरानी शहर में जंगल किनारे रहने वाले लोग लगातार घटना पर नजर बनाए हुए थे, ताकि आग फैलकर घर की ओर ना आ जाए। लोगो ने कहा कि हमने वन विभाग को सूचना दे दी है और लेकिन फायर ब्रिगेड पहुंचने में देरी हुई।


