छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के ग्राम जुनवानी में ईसाई धर्म के पास्टरों और पादरियों के एंट्री पर बैन लगा दिया है। गुरुवार को ग्रामीणों ने पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून का हवाला देकर गांव की सभी सीमाओं पर चेतावनी बोर्ड लगााया है। यह मामला भानुप्रतापपुर ब्लॉक का है। चेतावनी बोर्ड में लिखा गया है कि ‘पास्टर का धर्मांतरण क्रियाकलाप वर्जित है। भास्त के संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, हमारा ग्राम जुनवानी (बांसला) में पेसा कानून (पंचायत उपबंध क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम 1996 लागू है, जिसके नियम 4 (घ) के तहत सांस्कृतिक पहचान व रुढ़ीवादी संस्कृतिके संरक्षण प्राप्त है।’ लिखा गया है कि ‘गांव में आदिवासी को प्रलोभन देकर उनका धर्मांतरण करना हमारी संस्कृति की पहचान को नुकसान पहुंचाने के साथ आदिम संस्कृति को खतरा है। अतः हम ग्राम सभा के प्रस्ताव के आधार पर हमारे ग्राम जुनवानी में ईसाई धर्म के पास्टर और पादरी और बाहर गांव से आने वाले धर्मांतरित व्यक्तियों का धार्मिक/धर्मांतरण आयोजन के उद्देश्य से प्रवेश पर रोक लगाते है।’ धर्म परिवर्तन करवाने की कोशिश करते हैं पादरी-ग्रामीण ग्राम जुनवानी के गायता राजेंद्र कोमरा ने बताया कि गांव में लगातार आदिवासी धर्म परिवर्तन कर रहे हैं। पादरी और पास्टर आकर ग्रामीणों के धर्म परिवर्तन करवाने की कोशिश करते हैं। इससे संस्कृति पर संकट आ गया है। इसी कारण उन्होंने गांव की सीमाओं पर बोर्ड लगाकर पास्टर-पादरी के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया है। परंपरा की रक्षा की दिशा में उल्लेखनीय- जिला पंचायत सदस्य कांकेर जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र टेकाम ने इस कदम को शीतला माता और ठाकुर देव की परंपरा की रक्षा की दिशा में उल्लेखनीय बताया है। उन्होंने इसे एक सांस्कृतिक सुरक्षा अभियान करार दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि ईसाई धर्म के कुछ लोग इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं। लेकिन गांव की संस्कृति की रक्षा के लिए यह निर्णय आवश्यक था। कुड़ाल गांव में पास्टर-पादरियों की एंट्री बैन वहीं अब जुनवानी गांव के ग्रामीण अपने आराध्य बूढ़ादेव, शीतला माता और दंतेश्वरी मैया के जयकारे लगाते हुए मिशनरी के विरोध में उतर आए हैं। बता दें कि इससे पहले भानुप्रतापपुर ब्लॉक के ग्राम कुड़ाल में भी पास्टर और पादरियों के एंट्री पर बैन लगाया है। ग्रामीणों ने गांव की सीमाओं पर चेतावनी बोर्ड लगा दिए हैं, जिनमें पादरी, पास्टर और धर्मांतरित व्यक्तियों का गांव में प्रवेश वर्जित बताया गया है।


