कांकेर महाविद्यालय में जनजातीय समाज के योगदान पर कार्यक्रम:ऐतिहासिक, सामाजिक, आध्यात्मिक पहलुओं पर चर्चा, विजेताओं को सम्मान मिला

कांकेर जिले के एक महाविद्यालय में जनजातीय समाज के ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक योगदान विषय पर एक दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें भाजपा छत्तीसगढ़ के प्रदेश उपाध्यक्ष सतीश लाटिया, जनपद पंचायत चारामा की अध्यक्ष जागेश्वरी भास्कर और जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष अंकित जैन सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान जनजातीय नायकों से संबंधित एक प्रदर्शनी लगाई गई। विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई रंगोली, चित्रकला पोस्टर और छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का भी अवलोकन किया गया। अवलोकन के पश्चात् अतिथियों का परिचय और स्वागत किया गया। आदिवासी नायकों के योगदान पर कार्यक्रम प्राचार्य द्वारा स्वागत उद्बोधन दिया गया, जबकि कार्यक्रम के संयोजक कुलेश्वर प्रसाद ने जनजातीय समाज के गौरवशाली अतीत के संबंध में प्रस्तावना प्रस्तुत की। मुख्य वक्ता विकेश कुमार हिचामी ने जनजातीय समाज के गौरवपूर्ण ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बस्तर सहित पूरे देश में कई जनजातीय जननायक हुए हैं, जिन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हिचामी ने भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह, शहीद गेंदसिंह और रानी दुर्गावती जैसे नायकों के इतिहास को युवाओं के लिए जानना आवश्यक बताया। वीर नारायण सिंह और बिरसा मुंडा के आदिवासी संघर्ष को किया याद उन्होंने बिरसा मुंडा के प्रकृति प्रेम और उनके द्वारा गांव में एकता व पर्यावरण जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों का उल्लेख किया। छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह का भी जिक्र किया गया, जिन्होंने किसानों और गरीबों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उन्हें 1857 में अंग्रेजों द्वारा षड्यंत्र पूर्वक गिरफ्तार कर लिया गया था। वक्ताओं ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में बस्तर के आदिवासी बंधुओं के महत्वपूर्ण योगदान पर भी जोर दिया।

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