कांग्रेसी मेंढ़क की तरह उछल-कूद कर रहे, इधर-उधर भाग रहे:मदन राठौड़ बोले-डोटासरा अपना घर संभाले, डोटासरा ने कहा था-राठौड़ सीएम की पुंगी बजा रहे

पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा के बयान पर पलटवार करते हुए बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि मैं क्या कर रहा हूं, क्या नहीं कर रहा हूं। उनको (डोटासरा) नहीं देखना है, मेरा संगठन देखेगा। आप लोग (मीडिया) देख रहे हैं, मैं क्या कर रहा हूं, यह पर्याप्त है। मुझे गोविंद सिंह डोटासरा से सर्टिफिकेट तो लेना नहीं है। वह अपना घर संभाले ना, मेरी क्यों चिंता कर रहे हैं। वे मेरी पार्टी की चिंता कर रहे हैं, उनसे उनका घर को संभल नहीं रहा। उनके लोग तो मेंढक की तरह उछल-कूद करते इधर-उधर भाग रहे हैं। वह अपना घर संभाले, मैं अपना घर संभाल रहा हूं। दरअसल शनिवार को आयोजित बीजेपी की संगठनात्मक कार्यशाला में बीजेपी प्रदेश प्रभारी के नहीं आने पर तंज कसते हुए डोटासरा ने कहा था कि बीजेपी के प्रदेश प्रभारी क्यों नाराज हैं, वे क्यों नहीं आ रहे हैं, यह भी बताना चाहिए। इनके बीच भारी खींचतान है। इनकी सत्ता में दूरी है, संगठन के अंदर दूरियां हैं। मदन राठौड़ क्या कर सकते हैं, वे तो सीएम की पुंगी (एक तरह का वाद्ययंत्र) बजा रहे हैं, सीएम मोदी की और मंत्री इस सरकार की विफलता की पुंगी बजा रहे हैं। कार्यकर्ता बीजेपी का प्राण हैं
कार्यशाला में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कार्यकर्ता के साइन से काम नहीं करने वाले अधिकारियों को परिणाम भुगत लेने वाले बयान पर मदन राठौड़ ने कहा कि कार्यकर्ता भारतीय जनता पार्टी का प्राण है। कार्यकर्ता से ही संगठन बनता है। कार्यकर्ता की अपेक्षा नहीं होनी चाहिए, यह हम सब भी मानते हैं। उन्होने कहा कि कार्यकर्ता का सम्मान भी रहना चाहिए, यह बयान जनहित से जुड़े कामों को लेकर आया हैं। जनता के काम तो होने ही चाहिए। प्रदेश में सत्तारूढ़ पार्टी का कार्यकर्ता है, अधिकारी भी हमारा लगाया हुआ हैं। उसमें हम समन्वय रखे, यह ठीक बात हैं। परिवार साथ बैठकर, कुछ नहीं तो भजन ही करें
कार्यशाला में कुटुंब प्रबंधन को लेकर हुई चर्चा के बारे में बताते हुए मदन राठौड़ ने कहा कि मै आपके जरिए समस्त देशवासियों से आग्रह करना चाहूंगा कि अपने परिवार, बच्चों, पुत्रवधुओं, माता-पिता के साथ बैठकर संवाद करें, कुछ नहीं तो भजन ही करें। लेकिन एकसाथ बैठों, एक साथ बैठकर खाना खाओ। इससे परिवार व्यवस्था से चलेगा। पहले हमारे यहां आदर्श परिवार होता था। आजकल क्या हो गया है कि कोई बच्चा कहीं है, कोई कहीं। ठीक है, आप अपना उद्योग, व्यापार, काम करें। लेकिन महीने में एक-दो दिन तो ऐसे तय करें कि परिवार साथ बैठे।

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