कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन आज से गुजरात के अहमदाबाद में शुरू हो गया है। 2 दिन चलने वाले इस अधिवेशन का आयोजन ऐतिहासिक साबरमती के किनारे किया जा रहा है। बैठक में शामिल होने छत्तीसगढ़ के नेता गुजरात पहुंच चुके हैं। पहले दिन सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय स्मारक में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की अहम बैठक होगी, जिसकी अगुवाई कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे करेंगे। CWC की बैठक में क्या होगा खास? सुबह शुरू होने वाली इस बैठक में देशभर से ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के करीब 262 प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। इसमें पार्टी के संगठन से जुड़े बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। खास बात ये है कि बैठक में जिलास्तर के नेताओं को लेकर कुछ अहम प्रस्ताव भी रखे जा सकते हैं। सूत्रों की मानें तो बैठक में जिला अध्यक्षों को ज्यादा अधिकार देने पर गंभीर चर्चा होगी। खासकर बूथ लेवल तक संगठन को मजबूत करने के लिए उन्हें ज्यादा फैसले लेने की छूट मिल सकती है। इससे संगठन की पकड़ जमीन पर और मजबूत करने की कोशिश होगी। शाम को भजन और प्रार्थना सभा पहले दिन की बैठक के बाद शाम 5 बजे साबरमती आश्रम में एक शांति और एकता का संदेश देने वाली भजन-प्रार्थना सभा रखी गई है। इसमें सभी नेता गांधी जी को श्रद्धांजलि देंगे। ये अधिवेशन गुजरात में होना ही एक संदेश है – जयराम रमेश कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने कहा कि पटेल जी की जयंती को 150 साल हो रहे हैं और एक्सटेंडेड वर्किंग कमेटी की बैठक का सरदार पटेल स्मारक में होना एक अलग सा महत्व रखता है। सरदार पटेल जी का कांग्रेस, महात्मा गांधी जी और जवाहरलाल नेहरू जी के बीच में एक अटूट रिश्ता था। आधुनिक भारत बनाने में जवाहरलाल नेहरू जी और सरदार पटेल जी दोनों का योगदान था। ये दोनों लोग कांग्रेस के सिपाही थे और महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में काम करते थे। आज लोकतंत्र खतरे में है, संविधान पर आक्रमण हो रहा है। संविधान हमें सामाजिक न्याय, राजनीतिक न्याय और आर्थिक न्याय का रास्ता दिखाता है। ये न्याय हर नागरिक को मिले, ये न्याय पथ के मायने हैं। ये अधिवेशन गुजरात में होना ही एक संदेश है। राहुल गांधी की रणनीति क्या है? राहुल गांधी कांग्रेस के संगठन को जिलास्तर से लेकर हाईकमान तक फिर से मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसके तहत, वे जिलाध्यक्षों से संवाद का कार्यक्रम भी कर चुके हैं। ताकि पार्टी की ग्राउंड रिपोर्ट सीधे हाईकमान तक पहुंचे। उनकी योजना संगठन में पावर डिस्ट्रीब्यूशन को बैलेंस करने की भी है, ताकि जिलास्तर पर नेताओं को ज्यादा ताकत मिले, लेकिन हाईकमान की पकड़ भी बनी रहे। बूथ स्तर तक कांग्रेस को मजबूत करने के इस फॉर्मूले से राहुल प्रदेश नेतृत्व के असर को कम करते हुए संगठन की सीधी मॉनिटरिंग करना चाहते हैं। इससे गुटबाजी पर रोक लग सकती है, लेकिन प्रदेश के बड़े नेताओं की भूमिका कमजोर भी हो सकती है। जिला अध्यक्षों को पावर देने पर अंतिम फैसला अधिवेशन में ही होगा। क्या कांग्रेस में फिर लौट रहा है हाईकमान कल्चर? हाईकमान का सीधा दखल बढ़ने से क्या प्रदेश नेतृत्व की ताकत कम होगी? क्या कांग्रेस में एक बार फिर हाईकमान कल्चर लौटेगा? इस बैठक से पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी को रोकने में कितनी मदद मिलेगी, यह देखना दिलचस्प होगा। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ संगठन मजबूत करने की रणनीति है या कांग्रेस की पुरानी सत्ता संरचना को फिर से स्थापित करने की कोशिश?


