छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ACB-EOW की टीम ने कवासी लखमा और उनके करीबियों के 13 ठिकानों पर छापेमारी की। शनिवार को रायपुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, जगदलपुर और अंबिकापुर में में दबिश देकर दस्तावेज, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कई बैंक अकाउंट और जमीनों में निवेश से संबंधित दस्तावेज और 19 लाख रुपए कैश बरामद किए हैं। रायपुर में कांग्रेस नेता जी नागेश और ठेकेदार कमलेश नाहटा के घर टीम ने सुबह दबिश दी थी। देवेंद्र नगर में कांग्रेसी पार्षद उम्मीदवार श्रीनिवास राव के घर पहुंची। श्रीनिवास के साथ उनके भाई जी नागेश रहते हैं। नागेश कवासी का करीबी माने जाते हैं। वहीं इस शराब घोटाले मामले में EOW को आबकारी विभाग के 30 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति मिल गई है। कांग्रेस नेता ने बताया छापे के दौरान क्या हुआ जी नागेश के भाई जी श्रीनिवास राव ने बताया कि सुबह 5:45 बजे लगभग टीम घर पहुंची थी। छोटे भाई ने घर का दरवाजा खोला। EOW के अधिकारियों ने बताया कि नागेश के नाम पर सर्च वारंट है। हमने अधिकारियों को घर में सम्मान से बैठाया। श्रीनिवास ने कहा कि हम कहीं से गलत नहीं है, इसलिए हमें किसी बात का डर नहीं है। EOW के अधिकारियों को हमने जांच में पूरा सहयोग किया । जी श्रीनिवास राव ने बताया कि अधिकारियों ने कहा कि आप कवास लखमा के करीबी है, इसलिए हमें लग रहा है कि आबकारी मामले में आपकी संलिप्तता है? लेकिन हमने उन्हें जानकारी दी है कि उनसे हमारा व्यापारिक संबंध नहीं है। लेकिन पूर्व मंत्री लखमा से हमारा व्यक्तिगत और राजनीतिक संबंध है। प्रॉपर्टी के पेपर ले गई टीम कांग्रेस नेता श्रीनिवास राव ने बताया कि EOW के अधिकारियों ने जांच के दौरान हमसे कहा कि 2019-2023 के बीच में आपने जो रजिस्ट्री की होगी उसकी जानकारी दीजिए। हमारा जमीन खरीदी बिक्री का भी काम है। कुछ साल पहले हमने अपनी पुरानी जमीन बेचकर नई जमीन ली है और घर की प्रॉपर्टी के जो पेपर है। उसे हमने टीम को दिया है। फैमिली के सभी लोगों के मोबाइल को अलग रखा गया श्रीनिवास ने बताया कि छापे के दौरान टीम ने पूछा कि घर में किसी को कोई मेडिकल प्रॉब्लम तो नहीं है, अगर है तो आप दवाई ले लीजिए या इमरजेंसी जैसी स्थिति हो तो बताए। घर के सभी मेंबर के मोबाइल को अलग रखवाया गया। जी श्रीनिवास राव ने कहा कि कार्रवाई के दौरान हमने टीम का सहयोग किया। हम गलत नहीं है तो हमें किसी बात का डर नहीं है। कवासी लखमा के पैसों को इनवेस्ट करने के सवाल पर श्रीनिवास ने कहा कि सांच को आंच नहीं। ये सारी बातें हवा हवाई है। हम गलत नहीं है, इसलिए हमें डर नहीं है। अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति शराब घोटाले में फंसे आबकारी विभाग के 30 अधिकारियों के खिलाफ शासन से EOW को कार्रवाई की अनुमति मिल गई है। उनके खिलाफ जल्द EOW कार्रवाई कर सकती है। इसमें तत्कालीन सहायक जिला आबकारी अधिकारी जनार्दन कौरव, अनिमेष नेताम उपायुक्त, विजय सेन शर्मा उपायुक्त, अरविंद पाटले, प्रमोद नेताम, रामकृष्ण मिश्रा, विकास गोस्वामी सहायक आयुक्त, इकबाल खान, नितिन खंडुजा, नवीन प्रताप सिंह तोमर के नाम शामिल हैं। इसके अलावा मंजु केसर, सौरभ बख्शी, दिनकर वासनिक, अशोक सिंह, मोहित जायसवाल, नीतू नोतानी, रविश तिवारी, गरीबपाल दर्दी, नोहर सिंह ठाकुर जिला आबकारी अधिकारी समेत अन्य अधिकारी शामिल हैं। इनके खिलाफ चार्जशीट भी पेश की जा सकती है। इनके घर पर पड़ा छापा क्या है शराब घोटाला ? छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था। ED की ओर से दर्ज कराई गई FIR की जांच ACB कर रही है। ACB से मिली जानकारी के अनुसार साल 2019 से 2022 तक सरकारी शराब दुकानों से अवैध शराब डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर बेची गई। इससे शासन को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हुआ है। ED का आरोप- लखमा सिंडिकेट का अहम हिस्सा थे ED का आरोप है कि पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक कवासी लखमा सिंडिकेट के अहम हिस्सा थे। लखमा के निर्देश पर ही सिंडिकेट काम करता था। इनसे शराब सिंडिकेट को मदद मिलती थी।वही शराब नीति बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे छत्तीसगढ़ में FL-10 लाइसेंस की शुरुआत हुई। वही ED का दावा है कि लखमा को आबकारी विभाग में हो रही गड़बड़ियों की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने उसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया। कमिशन के पैसे से बेटे का घर बना, कांग्रेस भवन निर्माण भी ED के वकील सौरभ पांडेय ने बताया कि, 3 साल शराब घोटाला चला। लखमा को हर महीने 2 करोड़ रुपए मिलते थे। इस दौरान 36 महीने में लखमा को 72 करोड़ रुपए मिले। ये राशि उनके बेटे हरीश कवासी के घर के निर्माण और कांग्रेस भवन सुकमा के निर्माण में लगे। ईडी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है। शराब सिंडिकेट के लोगों की जेबों में 2,100 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध कमाई भरी गई। घोटाले की रकम 2100 करोड़ से ज्यादा लखमा के खिलाफ एक्शन को लेकर निदेशालय की ओर से कहा गया कि जांच में पहले पता चला था कि अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा और अन्य लोगों का शराब सिंडिकेट छत्तीसगढ़ राज्य में काम कर रहा था। इस घोटाले की रकम 2100 करोड़ रुपए से ज्यादा है। 2019 से 2022 के बीच चले शराब घोटाले में ED के मुताबिक ऐसे होती थी अवैध कमाई। FL-10 लाइसेंस क्या है ? FL-10 का फुल फॉर्म है, फॉरेन लिकर-10। इस लाइसेंस को छत्तीसगढ़ में विदेशी शराब की खरीदी की लिए राज्य सरकार ने ही जारी किया था। जिन कंपनियों को ये लाइसेंस मिला है, वे मैन्युफैक्चर्स यानी निर्माताओं से शराब लेकर सरकार को सप्लाई करते थे। इन्हें थर्ड पार्टी भी कह सकते हैं। खरीदी के अलावा भंडारण और ट्रांसपोर्टेशन का काम भी इसी लाइसेंस के तहत मिलता है। हालांकि इन कंपनियों ने भंडारण और ट्रांसपोर्टेशन का काम नहीं किया। इसे बेवरेज कॉर्पोरेशन को ही दिया गया था। इस लाइसेंस में भी A और B कैटेगरी के लाइसेंस धारक होते थे।


