कांग्रेस ने नेपानगर विधायक से बजट पर सवाल किए:पूछा- आदिवासियों के अधिकारों में कटौती हुई, फिर किस आधार पर इसे जनहितैषी बताया जा रहा

कांग्रेस आईटी सेल के प्रदेश महासचिव और खंडवा शहर के जिला प्रभारी धीरज करोसिया ने नेपानगर विधायक मंजू राजेंद्र दादू को केंद्रीय बजट की विसंगतियों पर एक विस्तृत ज्ञापन ईमेल के माध्यम से भेजा है। विधायक दादू, जो भाजपा की बजट प्रचार समिति की टोली प्रभारी भी हैं, से मतदाताओं की ओर से तीखे सवाल पूछे गए हैं। ज्ञापन में आधिकारिक बजट दस्तावेजों का हवाला देते हुए पूछा गया है कि जब बजट में गरीब, किसान और आदिवासियों के अधिकारों में कटौती की गई है, तो विधायक इसे जनहितैषी किस आधार पर बता रही हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बजट के प्रचार की चमक के पीछे कटौतियों का ‘काला सच’ छिपा है। धीरज करोसिया ने विधायक को बताया कि ग्रामीण विकास मद में पिछले वर्ष की तुलना में 53,067 करोड़ रुपए की भारी कटौती की गई है। जल जीवन मिशन में भी चौंकाने वाली कमी सामने आई है, जहां 67,000 करोड़ रुपए के अनुमान के मुकाबले वास्तविक खर्च केवल 17,000 करोड़ रुपए रहा। नेपानगर और बुरहानपुर जैसे जल संकटग्रस्त क्षेत्रों के लिए 50,000 करोड़ रुपए की यह कमी क्षेत्र की प्यास बुझाने के दावों पर सवाल उठाती है। आरोप- MSP पर गारंटी देने में सरकार विफल
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना में 890 करोड़ रुपए और छात्रवृत्ति योजनाओं में 690 करोड़ रुपए की कटौती की गई है। आदिवासी विकास कार्यक्रमों से 1,559 करोड़ रुपए कम कर दिए गए हैं। करोसिया ने सवाल किया है कि क्या शिक्षा और कल्याणकारी योजनाओं में यह कटौती उनके क्षेत्र के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं है, खासकर तब जब विधायक स्वयं एक आरक्षित क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं। आरोप लगाया गया है कि सरकार एमएसपी पर कानूनी गारंटी देने में विफल रही है और किसान पीएम सम्मान निधि में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसके विपरीत, कॉर्पोरेट जगत को टैक्स रियायतें दी जा रही हैं। मध्य प्रदेश को टैक्स हिस्सेदारी में मिलने वाले 7,500 करोड़ रुपए के नुकसान पर विधायक की चुप्पी राज्य के विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े करती है। ​जनता का तंज- प्रचार नहीं, जवाब चाहिए
​धीरज करोसिया ने विधायक से आग्रह किया है कि वे केवल दिल्ली से मिले प्रचार मॉड्यूल को न पढ़ें, बल्कि क्षेत्र की बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा के गिरते स्तर और मनरेगा में कम होते बजट पर केंद्रीय नेतृत्व से जवाब मांगें। विधायक जी बजट की खूबियां गिनाने का अभियान जरूर चलाएं, लेकिन साथ ही उन गरीबों, किसानों और मजदूरों को भी जवाब दें जिनकी थाली से सब्सिडी और जेब से रोजगार छीना गया है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *