भास्कर न्यूज | झालावाड़ नगरपरिषद के वार्ड संख्या 13 के उपचुनाव का परिणाम शुक्रवार को घोषित हो गया। यहां से कांग्रेस प्रत्याशी नफीस खान ने 27 मतों से अपनी जीत दर्ज कराई, जबकि भाजपा प्रत्याशी सिकंदर खान की जमानत जब्त हो गई। उनको सिर्फ 31 मत ही मिल पाए। सुबह से ही मिनी सचिवालय के ऑडिटोरियम में मतों की गणना शुरू हुई और करीब आधे घंटे में परिणाम जारी हो गया। उपचुनाव में 639 मत डाले गए थे। मतगणना में कांग्रेस प्रत्याशी नफीस खान को 315 मत मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी सिकंदर खान को 31 मत ही मिल पाए। यहां भाजपा प्रत्याशी से अधिक निर्दलीय प्रत्याशी मुमताज अली वोट ले गए। उनको 288 मत मिले, वहीं 5 वोट नोटा को मिले। भाजपा यहां तीन प्रत्याशियों में आखिरी नंबर पर रही। पहले भी यह वार्ड कांग्रेस के ही पाले में था। इस वार्ड में मोहम्मद शफीक खान पार्षद थे, लेकिन उनके निधन के बाद यह वार्ड रिक्त हो गया था। अब इस वार्ड को उपचुनाव के बाद फिर से पार्षद मिल पाया है। मतगणना के दौरान रिटर्निंग अधिकारी अभिषेक चारण, एडीएम सत्यनारायण आमेठा और कार्यवाहक आयुक्त नरेंद्र मीणा मौजूद रहे। 4 साल पहले इसी वार्ड से भाजपा प्रत्याशी को 173 वोट मिले थे नगरपरिषद में भाजपा का बोर्ड है। इस बोर्ड में अव्यवस्थाओं के आलम के चलते ही लोगों ने भाजपा से किनारा कर लिया। इस वार्ड में चार साल पहले भाजपा के प्रत्याशी को 173 वोट मिले थे, वहीं चार साल बाद इसी वार्ड में भाजपा की प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई। भाजपा का बोर्ड होते हुए भी शहर में सफाई व्यवस्था से लेकर रोड लाइटों के हालात खराब हैं। नगरपरिषद में निर्माण स्वीकृति से लेकर विभिन्न कार्यों के लिए लोगों को महीनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। कई बार चक्कर काटने के बाद भी उनके काम नहीं हो पा रहे हैं। एक साल से तो बोर्ड की बैठक तक नहीं हो पाई है। शहरवासियों का यही गुस्सा उपचुनाव की वोटिंग में भाजपा के खिलाफ दिखाई दिया। भाजपा को 4.85 फीसदी ही मत निर्दलीय को 45% से अधिक वार्ड संख्या 13 के उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी को काफी कम वोट मिल पाए। जानकारी के अनुसार भाजपा उम्मीदवार को कुल वोटों से 4.85 फीसदी ही वोट भाजपा प्रत्याशी को मिल पाए, जबकि निर्दलीय प्रत्याशी को इनसे कहीं अधिक 45 फीसदी वोट मिले। इसी तरह उपचुनाव के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी को 49.29 फीसदी वोट मिले। पिछले चुनाव में 8 वोट से पराजित हुए थे नफीस खान नफीस खान पहले भी चुनाव लड़ चुके हैं और पिछली बार महज 8 वोटों से ही हारे थे। वे पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े थे, लेकिन इस बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा। कांग्रेस ने इस वार्ड से अपनी परंपरागत सीट को बरकरार रखा है। कांग्रेस की जीत को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है।


