जयपुर जिले के कानोता, चंदलाई और नेवटा बांधों के जल को प्रदूषण मुक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। जल संसाधन विभाग द्वारा भारत सरकार से अधिकृत विशेषज्ञ एजेंसियों के माध्यम से इन तीनों बांधों पर विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन कराया जा रहा है। विशेषज्ञों की टीम बांधों में जल प्रदूषण के स्रोतों की पहचान, जल गुणवत्ता सुधार, जीआईएस आधारित मानचित्रण, जैव विविधता संरक्षण और आधुनिक जल उपचार तकनीकों के उपयोग पर गहन अध्ययन कर रही है। इसके साथ ही स्थानीय आजीविका सृजन और पर्यावरण पर्यटन की संभावनाओं को भी परियोजना में शामिल किया जा रहा है। अध्ययन के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर राज्य सरकार को शीघ्र सौंपे जाने की योजना है। बांधों में प्रदूषित जल कहां से, कितनी मात्रा में और किस प्रकार पहुंच रहा रिपोर्ट में स्पष्ट होगा जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता और दूरदृष्टि के कारण राजस्थान जल और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक मजबूत उदाहरण बनकर उभर रहा है। सरकार के प्रयास न केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा कर रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित भविष्य का मार्ग भी प्रशस्त कर रहे हैं। एजेंसी द्वारा तैयार की जाने वाली रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाएगा कि बांधों में प्रदूषित जल कहां से, कितनी मात्रा में और किस प्रकार पहुंच रहा है। साथ ही प्रदूषण रोकने के प्रभावी उपाय, जल निकास के वैकल्पिक मार्ग, दीर्घकालीन विकास योजना और जल प्रबंधन प्रणाली की विस्तृत रूपरेखा भी शामिल होगी। रिपोर्ट में सिंचाई के लिए जल आपूर्ति व्यवस्था, आवश्यक मशीनरी तथा प्रबंधन ढांचे का भी उल्लेख किया जाएगा। बांधों पर पर्यटन विकास की संभावनाओं को भी रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा इसके अलावा बांधों पर पर्यटन विकास की संभावनाओं को भी रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा। प्रस्तावित योजनाओं में बोटिंग सुविधा, ग्रीन लैंड का विकास और डे-नाइट टूरिज्म को बढ़ावा देने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल सके। उल्लेखनीय है कि जल और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ‘वंदे गंगा’ जल संरक्षण जन अभियान के तहत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रामगढ़ बांध के भराव क्षेत्र में सफाई और मिट्टी हटाने के कार्य का शुभारंभ किया था। इसमें स्थानीय नागरिकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, जो जन-सहभागिता आधारित विकास नीति का प्रभावी उदाहरण है। इसके बाद प्रदेशभर में जल स्रोतों के संरक्षण, जल संग्रहण क्षमता बढ़ाने और पारिस्थितिक संतुलन को पुनर्स्थापित करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए गए हैं।


