विक्की कुमार सीएम मान ने ट्रांसपोर्ट विभाग के दफ्तरों में लोगों को किसी तरह की परेशानी न होने का दावा किया था मगर जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। रिजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (आरटीओ) में ड्राइविंग लाइसेंस, लर्निंग लाइसेंस, आरसी और आरसी रिन्यूअल से जुड़ी फाइलों की पेंडेंसी लगातार बढ़ती जा रही है। हालात यह हैं कि रोजाना बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर दफ्तर पहुंच रहे हैं, लेकिन समाधान के नाम पर केवल तारीखें और आश्वासन ही मिल रहे हैं। आरटीओ दफ्तर में पक्के ड्राइविंग लाइसेंस की अप्रूवल को लेकर स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है। सूत्रों के मुताबिक 2 हजार से अधिक पक्के ड्राइविंग लाइसेंस की अप्रूवल अब भी पेंडिंग पड़ी है। यही नहीं, लर्निंग लाइसेंस के मामलों में भी फाइलें अटकी हुई हैं। वाहन मालिकों का कहना है कि आवेदन किए महीनों बीत चुके हैं, लेकिन स्टेटस जस का तस बना हुआ है। आरसी और आरसी रिन्यूअल से जुड़ी पेंडेंसी भी कम नहीं है। कई लोग ऐसे हैं, जिनके वाहन कागजों के अभाव में सड़क पर चलने से पहले ही अवैध की श्रेणी में आ रहे हैं। इससे चालान का डर सता रहा है। दीपक मेहरा का कहना है कि जुलाई 2025 में गाड़ी खरीदी थी। इसके बाद उन्होंने नंबर भी लिया। एजेंसी को उन्होंने सारी पेमेंट कर दी, लेकिन इसके बावजूद अभी तक उन्हें आरसी ही नहीं मिली है। जब दफ्तर जाकर पता किया तो उन्हें कहा गया कि उनकी आरसी अप्रूवल नहीं हुई है। इसलिए एजेंसी के माध्यम से ही आरसी अप्रूव होगी। हैरानी की बात है कि एजेंसी उनके दफ्तर में ही अप्रूवल के लिए भेजेगी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें एजेंसी में जाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि क्या विभाग की इन एजेंसियों पर कोई चेकिंग नहीं है कि यह पैसे लेने के बावजूद भी अप्रूवल क्यो नहीं कर रहे है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार का दावा है कि दफ्तरों में कोई परेशानी नहीं होगी तो उनका दावा कितना सही है, वह खुद देख रहे है। वाहन डैशबोर्ड पोर्टल की स्थिति भी सवालों के घेरे में है। पोर्टल पर उपलब्ध पेंडिंग एप्लीकेशन समरी के अनुसार वाहन रजिस्ट्रेशन से संबंधित करीब 15,858 आवेदन पेंडिंग हैं, जबकि ट्रांजेक्शन वाइज पेंडेंसी का आंकड़ा 24,284 तक पहुंच चुका है। इसके बावजूद यह स्पष्ट नहीं किया जा रहा कि इनमें से कितनी फाइलों को मंजूरी दी जा चुकी है और कितनी अब भी लंबित हैं। इससे तो साफ जाहिर है कि अधिकारी पोर्टल को अपने स्तर पर हैंडल कर रहे हैं, ताकि वास्तविक पेंडेंसी की तस्वीर सामने न आ सके। इससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आम लोगों का कहना है कि यदि सरकार के दावे सही हैं, तो फिर आरटीओ दफ्तरों में रोजाना लोगों को धक्के क्यो खाने पड़ रहे हैं। बता दें कि आरसी से संबंधित सभी अप्रूवल डालने का काम एआरटीओ मनदीप सिंह सोही को सौंपा है, जबकि आरसी की अप्रूव खुद आरटीओ डालते हैं। जगीर सिंह सोढी ने कहा कि उनके भाई ने 2 महीने पहले गाड़ी खरीदी थी। गाड़ी अपने नाम करवाने के लिए सभी फॉर्मेलिटी पूरी कर दी है। दस्तावेज भी ऑनलाइन जमा हो चुके हैं। जो भी वेरिफिकेशन होनी थी, वह भी हो चुकी है। दफ्तरों से भी वेरिफिकेशन हो चुकी है, लेकिन अभी तक उनकी आरसी की अप्रूवल नहीं डाली गई है। कई बार दफ्तरों के चक्कर काट चुके हैं। दफ्तर के हालात तो ऐसे है कि वहां पर 2 बजे के बाद कोई भी नहीं मिलता है। कई बार समय से पहले पहुंचे तो कहा गया कि आरटीओ दफ्तर में नहीं है, अप्रूवल वह ही करेंगे। हैरानी की बात है कि अगर अधिकारी छुट्टी पर है तो काम नहीं होगा।


