मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए स्पष्ट और सहायक साइन लगाए गए, ताकि विभिन्न वार्डों और विभागों तक पहुंचना आसान हो सके। सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ अखिल सरीन और डॉ रोहित रामपाल ने बताया कि अस्पताल में पार्किंग को लेकर नए नियम लागू किए गए हैं, जिनके तहत स्टाफ, एंबुलेंस, पुलिस वाहनों, दोपहिया वाहनों और मरीजों व अटेंडेंट्स के लिए अलग-अलग निर्धारित पार्किंग जोन बनाए गए हैं। इन नियमों को सुचारू रूप से लागू करने के लिए सुरक्षा गार्डों की तैनाती की गई है। एंबुलेंस के लिए प्रवेश और निकास मार्ग को पूरी तरह बाधारहित रखा गया है। परिसर में दिशा-निर्देश और जागरूकता के लिए कई फ्लेक्स बोर्ड लगाए गए हैं। पैदल यात्रियों, व्हीलचेयर और स्ट्रेचर के लिए अलग मार्ग तैयार किया गया है। आपातकालीन वार्ड को नए सिरे से विकसित किया गया है, जबकि बर्न्स, कैंसर डे-केयर, पेलिएटिव केयर, डेंगू और आइसोलेशन वार्ड कॉम्प्लेक्स का भी नवीनीकरण किया गया है। मुख्य सीवरेज सिस्टम में बड़े स्तर पर सुधार कार्य जारी है। नए वाटर टैंक का हैंडओवर अगले सप्ताह और विस्तारित एमसीएच विंग का हैंडओवर अगले महीने होने की उम्मीद है। इसके साथ ही क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है और अस्पताल परिसर को हराभरा बनाने के लिए करीब एक हजार पौधे लगाए गए हैं। राज्य स्तरीय कायाकल्प टीम के सदस्य डॉ. अमरजीत सिंह और डॉ. विक्रम सोहर ने सिविल अस्पताल का निरीक्षण करने के बाद कहा कि पहले और अब की स्थिति में जमीन-आसमान का फर्क साफ नजर आया। अस्पताल में हर स्तर पर प्रोग्रेस की गई है और बदलाव सिर्फ दिखावटी नहीं बल्कि उपयोगी भी हैं। आईसीयू वार्ड अब प्राइवेट रूम जैसा माहौल देता है। अस्पताल परिसर में पार्किंग व्यवस्था में भी स्पष्ट सुधार किया गया है, जिससे अव्यवस्था कम हुई है। वॉशरूम नए बनाए गए हैं और उनकी साफ-सफाई पहले के मुकाबले काफी बेहतर नजर आई। स्टोर में पड़ी बेकार वस्तुओं को भी सही तरीके से उपयोग में लाया गया है, जो संसाधनों के बेहतर प्रबंधन का उदाहरण है। बच्चों के लिए बनाए गए पार्क की व्यवस्था भी सुचारु है। कायाकल्प के तहत किए गए बदलाव सराहनीय हैं, लेकिन अब सबसे बड़ी बात यह है कि इन सुधारों को लगातार मेंटेन रखा जाए। रजिस्टर मेंटेनेंस, सफाई और शिकायत व्यवस्था पर दिया विशेष जोर : निरीक्षण के दौरान टीम ने स्टाफ से विभिन्न व्यवस्थाओं को लेकर विस्तार से सवाल-जवाब किए। टीम ने स्पष्ट किया कि हर गतिविधि से जुड़ा रजिस्टर नियमित रूप से मेंटेन होना चाहिए और किसी भी स्तर पर रिकॉर्ड में कमी नहीं होनी चाहिए। सुझाव बॉक्स की स्थिति की भी जांच की गई और यह पूछा गया कि क्या उसका अलग रजिस्टर रखा जा रहा है या नहीं। सिविल अस्पताल का दौरा करती कायाकल्प टीम।


