मलेशिया में बैठकर गैंगस्टर अमन साव का गैंग चलाने वाले मयंक सिंह उर्फ सुनील मीणा को तेलीबांधा पुलिस ने बुधवार को गिरफ्तार कर लिया है। प्रोडक्शन वारंट पर झारखंड पुलिस कड़ी सुरक्षा में उसे रायपुर लेकर पहुंची। दोपहर में उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां तेलीबांधा पुलिस ने गिरफ्तारी की कार्रवाई की। मयंक को पूछताछ के लिए 27 दिसंबर तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है। देर रात तक अधिकारी उससे पूछताछ करते रहे। मयंक ने ही तेलीबांधा स्थित पीआरए के दफ्तर के बाहर गोली चलाने की सुपारी दी थी। उसी ने दो बार रायपुर में शूटर भेजा था। 13 जुलाई 2024 को कराई फायरिंग, सोशल मीडिया में ली जिम्मेदारी: तेलीबांधा स्थित पीआरए दफ्तर के बाहर 13 जुलाई 2024 को दो नकाबपोश ने गोली चलाई थी। घटना के पांच घंटे बाद सोशल मीडिया पर गैंगस्टर मयंक सिंह का पोस्ट सामने आया था। उसने इस घटना की जिम्मेदारी ली थी। पोस्ट में उसने धमकी दी थी कि उसकी गैंग का पैसा नहीं देने वालों को वह काम करने नहीं देगा और उनका अंजाम बुरा होगा। गैंगस्टर अमन साव के एनकाउंटर के बाद से मयंक ही गैंग चला रहा था। वह गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के लिए भी काम करता है। अजरबैजान में छिपा हुआ था मयंक: मयंक सिंह को प्रत्यर्पण संधि के तहत यूरोप के अजरबैजान से भारत लाया गया है। एटीएस झारखंड ने गैंगस्टर मयंक को 2 सितंबर को गिरफ्तार किया था। प्रारंभिक पूछताछ में उसने कोरबा और रायपुर में रंगदारी के लिए फायरिंग कराना कबूल किया था। इसकी जानकारी झारखंड पुलिस ने रायपुर पुलिस को दी। इसके बाद गंज और तेलीबांधा थाना क्षेत्र के मामलों में गिरफ्तारी के लिए प्रोडक्शन वारंट जारी किया गया था।
रायपुर से झारखंड ले जाते समय अमन साव का हुआ था एनकाउंटर
मयंक के कहने पर दो शूटरों ने तेलीबांधा स्थित पीआरए दफ्तर के बाहर दो गोलियां चलाई थीं। पुलिस इस मामले में आधा दर्जन लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इससे पहले मयंक ने अमलीडीह और शंकर नगर इलाके में भी फायरिंग कराई थी। उसने कोरबा में भी हमला कराया था। इन मामलों में अमन साव को अक्टूबर 2024 में गिरफ्तार कर रायपुर लाया गया था। वह रायपुर जेल में बंद था। बाद में झारखंड पुलिस उसे वापस ले जा रही थी। 11 मार्च को रास्ते में अमन का एनकाउंटर हो गया। गैंगस्टर लॉरेंस ने मयंक को बनाया अमन गैंग का गुर्गा पुलिस के अनुसार राजस्थान के गंगानगर निवासी सुनील मीणा (26) का गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से सीधा कनेक्शन है। लॉरेंस ने ही सुनील को गैंगस्टर अमन साव की गैंग में शामिल कराया था। अमन के गैंग में आने के बाद ही माफिया नेटवर्क ने उसे मयंक सिंह नाम दिया। इसके बाद वह मयंक के नाम से रंगदारी वसूलने लगा। अमन और उसके गैंग के लोग उसे फोन नंबर भेजते थे। उन्हीं नंबरों पर फोन कर मयंक धमकी देता और फिर शूटर भेजे जाते थे। हर कॉल के बदले उसे एक लाख रुपए मिलते थे।


