जयपुर के रामबाग होटल में सोमवार को लेखक कार्तिकेय वाजपेयी अपनी नई पुस्तक द अनबिकमिंग के साथ पुस्तकप्रेमियों से रूबरू हुए। उन्होंने बताया कि जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में इस पुस्तक पर चर्चा होगी। इस पुस्तक को कुछ समय पहले दिल्ली में वरिष्ठ राजनेता डॉ. कर्ण सिंह, डॉ. मुरली मनोहर जोशी,आचार्य पुंडरिक महाराज और गेशे दोरजी दामदुल ने लॉन्च किया था।
दैनिक भास्कर से बात करते हुए कार्तिकेय वाजपेयी ने कहा इस पुस्तक में दलाई लामा और स्वामी सर्वप्रियानंद की भूमिकाएं (फॉरवर्ड) शामिल हैं। उनके योगदानों का उल्लेख पुस्तक की आध्यात्मिक और दार्शनिक प्रामाणिकता के प्रमाण के रूप में किया गया। इस पुस्तक को कार्तिकेय कोविड के समय से लिख रहे थे, जिसमें अध्यात्म, क्रिकेट और दार्शनिक अनुभव शामिल है।
कार्तिकेय ने कहा कि द अनबिकमिंग’ इस समझ पर आधारित है कि हमारे अधिकांश दुःख का कारण उन पहचानों से चिपके रहना है, जो भय और अपेक्षाओं से गढ़ी जाती हैं। मूलतः यही वह एकमात्र तत्व है जो हमें एक व्यक्ति के रूप में सीमित करता है। इसलिए निराकार बनिए, विचारों से मुक्त रहिए और अपनी स्वयं-निर्मित छवि तथा दूसरों द्वारा थोपे गए दृष्टिकोणों से स्वयं को मुक्त कीजिए। आधुनिक जीवन में आत्म-मंथन अत्यंत आवश्यक है। यह हमें स्पष्टता के साथ कर्म करने में सहायक होता है, साथ ही उपस्थिति और सजगता में स्थिर बनाए रखता है। इन्हीं विचारों को पुस्तक में शामिल किया गया है। पेंगुइन ने किया है प्रकाशन पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया की ओर से प्रकाशित ‘द अनबिकमिंग’ एक गहन और विचारोत्तेजक उपन्यास है, जो प्रसिद्ध क्रिकेटर सिद्धार्थ और उनके जीवन-मार्ग को दिशा देने वाले अनुभवी कोच अजय के बीच विकसित होते संबंध को केंद्र में रखता है। जब उनका वर्षों पुराना गुरु–शिष्य संबंध कठिन दौर से गुजरता है, तो दोनों ही अपनी पहचान के भ्रम, अनिश्चित भविष्य के भय और अपेक्षाओं के भारी दबाव से जूझने को मजबूर होते हैं। भावनात्मक सच्चाई और दार्शनिक आत्ममंथन को सहजता से जोड़ते हुए, यह उपन्यास विरासत में मिली पहचानों को छोड़कर अपने वास्तविक अस्तित्व की ओर लौटने की प्रक्रिया पर गहरा और संवेदनशील चिंतन प्रस्तुत करता है। कार्तिकेय वाजपेयी एक अनुभवी वकील हैं और नई दिल्ली स्थित अपनी लॉ फर्म का सफलतापूर्वक संचालन करते हैं। राज्य स्तर पर क्रिकेट खेलने का अनुभव रखने वाले वाजपेयी वर्तमान में लॉयर्स क्रिकेट वर्ल्ड कप में टीम इंडिया लॉयर्स का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। वे लंबे समय से ध्यान साधनाओं के अभ्यासकर्ता हैं और ट्रान्सेंडेंटल मेडिटेशन, क्रिया योग, बौद्ध दर्शन तथा अद्वैत वेदांत के अध्ययन में उनकी गहरी रुचि रही है।


