मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने मंगलवार को तमिलनाडु के थिरुपरंकुंड्रम पहाड़ी पर स्थित पत्थर के स्तंभ पर कार्तिगई दीपम जलाने के एकल न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखा। न्यायमूर्ति जी जयचंद्रन और न्यायमूर्ति केके रामकृष्णन की बेंच ने कहा कि दीपम जलाने के मुद्दे को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दिया गया, जबकि यह लंबे समय से चली आ रही धार्मिक परंपरा से जुड़ा मामला है। यह मामला हिंदू तमिल पार्टी के नेता राम रविकुमार की याचिका से जुड़ा है, जिसमें कार्तिगई दीपम पर्व के दौरान पहाड़ी की चोटी पर दीप प्रज्ज्वलन सुनिश्चित करने की मांग की गई थी। पिछले साल 1 दिसंबर को हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन ने याचिका स्वीकार करते हुए दीपम जलाने का आदेश दिया था, लेकिन तमिलनाडु सरकार ने कानून-व्यवस्था की आशंका का हवाला देकर आदेश लागू नहीं किया। पहले जानिए यह विवाद क्या है? तमिलनाडु की थिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी पर सुब्रमण्या स्वामी मंदिर और सिकंदर बादशाह दरगाह स्थित हैं। विवाद का केंद्र दीपाथून स्तंभ (दरगाह से 15 मीटर दूर) कार्तिगै दीपम जलाने का है। हिंदुत्व संगठनों ने अनुमति मांगी, मद्रास हाईकोर्ट ने 2025 में छूट दे दी। तमिलनाडु सरकार ने कानून-व्यवस्था का हवाला देकर लागू नहीं किया, जिससे झड़पें हुईं। 18 दिसंबर: दीपक विवाद में व्यक्ति ने थाने में सुसाइड कियादीपाथून दीपक विवाद को लेकर 18 दिसंबर को मदुरै में पूर्णचंद्रन (40) ने पुलिस चौकी में खुद को आग लगाई थी। इलाज के दौरान अस्पताल में पूर्णचंद्रन की मौत हो गई। उसके दोस्तों ने पुलिस को बताया था कि पूर्णचंद्रन ने सुसाइड से पहले ऑडियो क्लिप शेयर किया था। इसके बाद पुलिस ने पूर्णचंद्रन का मोबाइल रिकवर किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ऑडियो क्लिप में पुरुष की आवाज है। जो दीपक विवाद की घटना से परेशान होने की बात कहता सुनाई दे रहा है। साथ ही पेरियार प्रतिमा के पास खुद को आग लगा देने की बात भी कहता नजर आता है।


