भास्कर न्यूज। धौलपुर ग्रामीण क्षेत्रों में दूसरों के नाम से जारी ट्रांसफार्मर को अन्य लोगों द्वारा उपयोग में लिए जाने और उससे बिजली चोरी मामले में एक और प्रकरण सामने आया है। डिस्कॉम ने खेरली क्षेत्र में तीन डीपी चिन्हित किए हैं, जो अवैध रूप से संचालित है। जिन्हे आजकल में जब्त कर लिया जाएगा। जिसकी पुष्टि अधिकारियों ने की है। पुलिस फोर्स के साथ टीपी की जब्ती एवं दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उल्लेखनीय है कि कार्मिकों की मिलीभगत से राजाखेड़ा क्षेत्र में टीपी के जरिए बिजली चोरी का खेल चल रहा है। पिछले एक पखवाड़े में आठ टीपी जब्त किए जा चुके हैं। इन टीपियों से अन्य लोगों को अवैध रूप से खंभे और केबल डाल कर बिजली चोरी हो रही थी और अन्य लोगों को भी सप्लाई दी जा रही थी। खेरली गांव में बिजली चोरी का एक बड़ा और संगठित खेल सामने आया है। इन ट्रांसफार्मरों से न केवल बिजली चोरी की जा रही थी,बल्कि किसानों को सिंचाई/आपासी देकर लाखों रुपए कमाने का पूरा नेटवर्क चल रहा था। धौलपुर. डीपीयों से बिजली चोरी की कार्रवाई करती डिस्कॉम टीम। ^प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बिजली चोरी कर किसानों को सिंचाई के लिए घंटे के हिसाब से पानी देते थे। जांच के बाद इन पर उसी हिसाब से जुर्माना भी किया जाएगा। वहीं क्षेत्र में दोबारा सघन अभियान चलाया जाएगा,ताकि नजर से बचे अवैध ट्रांसफार्मरों को चिन्हित कर उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जा सके। -राजेश कुमार वर्मा, अधीक्षण अभियंता धौलपुर डिस्कॉम कैसे चल रहा खेल… ट्रांसफार्मर दूसरों के नाम से जारी किए गए थे लेकिन उनकी बोरिंग खराब होने या अन्य कारणों से उन्हें नियत स्थानों पर नही लगाकर दूसरे स्थानों पर स्थापित कर बिजली चोरी कर मोटी कमाई का खेल चलाया जा रहा था। कई किसान जानते थे कि यह सब गैरकानूनी है, लेकिन फसल बचाने की मजबूरी के चलते वे तय रकम देने को मजबूर थे। इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि इन अवैध ट्रांसफार्मरों से जुड़े लोग एक घंटे पानी देने के बदले किसानों से करीब 325 रुपए तक वसूल रहे थे। सामान्य तौर पर एक बीघा जमीन में फसल की सिंचाई के लिए 8 से 10 घंटे या उससे अधिक समय लगता है। ऐसे में एक बीघा की आपासी पर ही किसान को 2500 से 3000 रुपए तक चुकाने पड़ रहे थे। अगर यही गणित 10 बीघा जमीन पर लगाया जाए,तो एक ही चक्र में 30 हजार रुपए से अधिक की कमाई हो रही थी। सूत्रों के मुताबिक यह खेल लंबे समय से चल रहा था और हर दिन कई किसानों को पानी देकर मोटी रकम वसूली जा रही थी। बिजली की कोई मीटरिंग नहीं,कोई अधिकृत कनेक्शन नहीं सिर्फ अवैध लाइन और चोरी की बिजली से पूरा धंधा फल-फूल रहा था। किसानों ने बताया कि जिन बोरिंग में पानी कम था एवं कम पानी आने से खेतों की सिंचाई में अधिक समय लगने पर यह 50 रुपए कम कर देते हैं।


