केंद्र सरकार द्वारा एलपीजी सिलेंडर के दामों में 60 रुपए की भारी बढ़ोतरी के बाद भरतपुर में गैस को लेकर अफरा-तफरी का माहौल है। एक ओर जहां गैस एजेंसियों पर सुबह से ही उपभोक्ताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर इस संकट का फायदा उठाकर कालाबाजारी करने वाला गिरोह भी सक्रिय हो गया है। शहर में आपूर्ति की कमी और बढ़ती मांग के बीच घरेलू सिलेंडर 1200 से 1300 रुपए तक में अवैध रूप से खुलेआम बेचा जा रहा है। भास्कर टीम ने शहर में गैस की वास्तविक स्थिति और कालाबाजारी के खेल का पर्दाफाश करने के लिए प्रमुख गैस एजेंसियों पर ग्राउंड जीरो पड़ताल की। टीम ने ग्राहक बनकर अलग-अलग इलाकों में हॉकरों से संपर्क किया, जिसमें चौंकाने वाले खुलासे हुए। शुरुआत में कई हॉकरों ने सप्लाई कम होने का हवाला दे हाथ खड़े कर दिए, लेकिन जब ट्रांसपोर्ट नगर स्थित एक गैस एजेंसी के गोदाम पर देखा तो वहां खुलेआम ब्लैक मार्केटिंग का सौदा होते दिखा। बिचौलिए के जरिए 1200 में राजी हुआ हॉकर… पॉइंट पर मौजूद एक हॉकर ने पहले तो सिलेंडर देने से मना किया, विश्वास में लेने के बाद उसने सीधे तौर पर 1200 से 1300 रुपए की मांग रख दी। उसने स्पष्ट चेतावनी दी कि ”बाद में यह मत कहना कि बताया नहीं था।” इसी तरह एक अन्य हॉकर ने बिचौलिए के जरिए सिलेंडर दिलवाने का आश्वासन दिया, जिसके लिए उसने भी 1200 रुपए की शर्त रखी। रुपए मांग रहा था, यह मोलभाव बताता है कि कालाबाजारी का बाजार शुरू हो चुका है। बुकिंग के नियम बदले, अब करना होगा लंबा इंतजार… गैस की अचानक बढ़ी मांग को देखते हुए कंपनियों ने बुकिंग के नियमों में भी कड़ा बदलाव कर दिया है। अब एचपी गैस के उपभोक्ता 30 दिन से पहले दोबारा सिलेंडर बुक नहीं करा सकेंगे। वहीं, भारत गैस और इंडेन गैस के उपभोक्ताओं के लिए यह सीमा 25 दिन तय की गई है। एजेंसियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में बुकिंग में 40 से 60 प्रतिशत का उछाल आया है। रोजाना होने वाली 200-300 की बुकिंग अब 500 के पार पहुंच गई है। इसके अलावा कंपनियों ने डीबीसी सुविधा को भी फिलहाल बंद कर दिया है। यूपी की नजदीकी से हो रही कालाबाजारी भरतपुर की भौगोलिक स्थिति का फायदा भी अवैध कारोबारी उठा रहे हैं। उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे होने के कारण अछनेरा, फतेहपुर सीकरी, गोवर्धन और किरावली जैसे क्षेत्रों से अवैध रूप से सिलेंडर लाकर भरतपुर में खपाए जा रहे हैं। चूंकि यूपी के ग्रामीण इलाकों में खपत कम है, वहां के कुछ हॉकर और बिचौलिए महंगे दामों के लालच में सिलेंडरों की तस्करी कर रहे हैं। प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा यह खेल न केवल उपभोक्ताओं की जेब पर डाका डाल रहा है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी बड़ा खतरा बना हुआ है। वहीं शहर में गैस संकट गहराने के पीछे शादी समारोहों का सीजन होना है। 6 से 12 मार्च तक घरेलू और कॉमर्शियल दोनों सिलेंडरों की खपत बढ़ गई है। पिछले 3 दिन में प्लांटों पर टैंकर भी कम पहुंचे हैं।


