जालंधर| कालिका धाम किशनपुरा में भक्तों की ओर से दुख निवारण चंडी महायज्ञ का आयोजन किया गया। इसमें आचार्य इंद्रदेव काली (बबलू पंडित) ने अध्यक्षता की। उन्होंने हवन के माध्यम से भक्तों को बताया कि मनुष्य के वर्तमान जीवन में किए गए कर्मों का फल जहां जन्म जन्मांतर में प्राप्त होते रहते हैं, वहीं,कर्मों के फल वर्तमान जन्म में भी प्राप्त हुआ करते हैं। इस नियम के अनुसार, आयु अर्थात् जीवन काल आगे-पीछे रह सकता है। इसी भांति सुख-दुख का जो परिणाम इस जीवन में भोगने के लिए निश्चित होकर आया है, उसमें भी कर्म अनुसार परिवर्तन होता रहता है।


