जेलों से सीएम और डिप्टी सीएम को धमकी मिलने के बाद मोबाइल का उपयोग कर रहे बंदियों की पहचान के प्रयास तेज किए जा रहे हैं। गृह विभाग ने पुलिस को जेल के आस-पास लगे टावरों के डाटा एनालिसिस के निर्देश दिए हैं। एक ही टावर की लोकेशन वाले नंबरों को खंगाला जा रहा है। साथ ही जयपुर सेंट्रल जेल सहित ग्यारह जेलों में मोबाइल का उपयोग रोकने के लिए टी-एचसीबीएस (टावर ऑफ हार्मोनी कॉल ब्लॉकिंग सिस्टम) टावर लगाए जा रहे हैं। इसमें जेल से फोन डायल करते ही मोबाइल नंबर पता चल जाएगा। टावर कॉल मेच्योर होने से रोकेगा। इससे बंदी के साथ-साथ उससे बात करने वालों का भी खुलासा हो सकेगा। गृह विभाग के एसीएस आनंद कुमार ने पुलिस व जेल विभाग के अधिकारियों की बैठक ली थी। इसमें निर्णय लिया गया कि टावरों का एनालिसिस किया जाए। जेल से आने वाली काल रुकेगी, बाहरी क्षेत्र बेअसर
इस तकनीक में टावर जेल परिसर में लगेगा। इसका जिम्मा बीएसएनएल को दिया गया है। इस पर सभी मोबाइल सेवा प्रदाता कम्पनियों की मशीनरी लगेगी। जेल व आसपास के क्षेत्र से आने वाली सभी कॉल के लिए यही प्रमुख बीटीएस टावर रहेगा। जेल से आने वाली काल इसी टी-एचसीबीएस टावरों तक पहुंचेगी, जिसे वहीं रोक दिया जाएगा। यहां वह नंबर भी पता चलेगा, जिससे काल किया गया है। जेल परिधि को सिस्टम में फीड किया जाएगाा। इससे बाहरी क्षेत्र से आने वाली काल ड्रॉप नहीं होगी। दूरसंचार विभाग ने यही दावा किया है कि 5जी सिग्नल को ब्लॉक करने के लिए भी टीएचसीबीएस सिस्टम को अपग्रेड किया जा सकेगा। टावर संचालन के लिए बिजली, सोलर व बैटरी बैकअप की भी व्यवस्था की गई है। नई तकनीक का तिहाड़ जेल में किया था परीक्षण
जेलों में मोबाइल का उपयोग रोकने को नई तकनीक वाले टावरों का परीक्षण तिहाड़ जेल में किया गया। तिहाड़ जेल के डीजी की अध्यक्षता वाली समिति ने जेलों में मोबाइल नेटवर्क का अध्ययन किया था। समिति में सी-डॉट, डीओटी, डीआरडीओ, एसपीजी, आईबी, आईआईएससी और आईआईटी, मद्रास के प्रतिनिधि शामिल थे। समिति ने टी-एचसीबीएस टावर को उपयुक्त माना। जेलों से कब-कब और किसे दी गईं धमकियां


