हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में जहां कड़ाके की ठंड में लोग घरों में दुबके हुए हैं, वहीं एक निजी स्कूल की संचालिका ने मानवता की अनूठी मिसाल पेश की है। रिकांगपिओ स्थित उड़ान स्कूल की संचालिका डोलमा नेगी ने अपने स्कूल परिसर को बेसहारा पशुओं का सुरक्षित आश्रय बना दिया है। स्कूल की चल रही छुट्टियां वर्तमान में स्कूल में छुट्टियां चल रही हैं, और डोलमा ने इस अवसर का सदुपयोग करते हुए रिकांगपिओ और आसपास के क्षेत्रों से दर्जनों बेसहारा पशुओं को एकत्र कर उन्हें स्कूल परिसर में शरण दी है। वह स्वयं इन पशुओं के भोजन और देखभाल की व्यवस्था कर रही हैं। डोलमा नेगी के अनुसार आजकल लोगों में मानवीय संवेदनाएं कम होती जा रही हैं। कई लोग अपने पालतू पशुओं को जरूरत न होने पर सड़कों पर छोड़ देते हैं। गोशालाओं की स्थिति में सुधार की मांग भारी बर्फबारी और माइनस तापमान में ये पशु या तो ठंड से मर जाते हैं या फिर आवारा कुत्तों का शिकार बन जाते हैं। उन्होंने प्रशासन से जिले में गोशालाओं की स्थिति में सुधार की मांग की है। हालांकि जिले में कुछ गोशालाएं हैं, लेकिन वहां पशुओं के रहने की उचित व्यवस्था नहीं है। डोलमा ने लोगों से अपील की है कि वे अपने पशुओं को लावारिस न छोड़ें और सरकार से भी आग्रह किया है कि लावारिस पशुओं के लिए उचित व्यवस्था की जाए। इससे ना केवल पशुओं को सुरक्षित आश्रय प्रदान किया है, बल्कि समाज के लिए भी एक सकारात्मक संदेश दिया है कि मानवता अभी जीवित है।


