किसानों का आरोप- प्रशासन ने हेराफेरी से तय जगह बदल दी, सचिव बोले- ये बात सही नहीं, मास्टर प्लान से ही जमीन ली

भास्कर संवाददाता | सीकर नवलगढ़ रोड से फतेहपुर रोड को जोड़ने वाली साढ़े 6 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित रिंग रोड को लेकर किसानों का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। किसानों का आरोप है कि प्रशासन ने निर्धारित स्थान से हटकर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे उनकी उपजाऊ कृषि भूमि प्रभावित हो रही है। मास्टर प्लान-2031 के नक्शे में रिंग रोड की स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाई गई है। इसमें भादवासी और भैरूंपुरा अंडरपास के पास रिंग रोड का प्रावधान है। वहीं नवलगढ़ रोड पर सीकर से 6 किलोमीटर तथा बीकानेर रोड पर सीकर से 5 किलोमीटर की दूरी पर पक्का चौराहा दर्शाया गया है। इसके बावजूद सीकर यूआईटी द्वारा 100 से 200 मीटर उत्तर दिशा में भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है, जो मास्टर प्लान से अलग बताया जा रहा है। किसानों ने आरोप लगाया है कि करीब 200 फीट जमीन की हेराफेरी की गई है और ये सब एक व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। उनका कहना है कि योजना के तहत उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहित होने से खेती पर सीधा असर पड़ेगा, साथ ही भविष्य में ग्रामीणों के रोजगार और जीवनयापन पर भी गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। धरनास्थल पर बैठे किसानों ने मांग की है कि मास्टर प्लान के अनुसार ही भूमि अधिग्रहण किया जाए और जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। परिवारों को रोजगार और पुनर्वास की गारंटी मिले : प्रस्तावित जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों का धरना आठवें दिन भी जारी रहा। आरोप है कि हेराफेरी के साथ ही अधिग्रहण से पहले उचित मुआवजा और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। विकास के नाम पर किसानों की जमीन छीनना गलत है। यदि वास्तव में सड़क या अन्य परियोजना आवश्यक है तो वैकल्पिक मार्ग तलाशे जाएं या किसानों को बाजार दर पर मुआवजा दिया जाए। इनका कहना है कि यह रोड तो आबादी क्षेत्र में आ जाएगी, इससे उपयोग नहीं होगी। इस रोड को हाइवे से जोड़नी चाहिए, ताकि लोगों को सुविधा मिलेगी। इधर, गुरुवार को धरने में बैठे लोगों ने नारेबाजी की और भूमि अवाप्ति को लेकर विरोध जताया। धरने में लक्ष्मण सिंह भामू, मदन सिंह फगेड़िया, हरदयाल ढाका, विद्याधर, आशीष, विक्रम, राजेंद्र काजला, हनुमान सिंह, रामावतार, महावीर आदि मौजूद थे। Q. ग्रामीणों का आरोप है िक निर्धारित जगह को बदल कर हेराफेरी की गई है। A. विभाग ने मास्टर प्लान-2031 के अनुसार ही जमीने अवाप्ति की कार्रवाई की है। आरोप गलत है। Q. किसानों का आरोप है िक उन्हें पर्याप्त मुआवजा भी नहीं िदया जा रहा है। A. योजना के लिए सहमति वाले 70 फीसदी किसानों को मुआवजा जारी कर दिया गया। सिर्फ पेड़ और भवन निर्माण का बाकी रहा है वो भी जल्द कर िदया जाएगा। Q. किसानों का कहना है िक भूमाफिया को फायदा पहुंचाने के िलए गड़बड़ी की जा रही है। A. मास्टर प्लान बनाने का कार्य 2013 से पहले हुआ है। अब उसी के अनुसार रिंग रोड के लिए जमीन ली जा रही है। ये आरोप गलत हैं। रिंग रोड को लेकर यूआईटी के तकनीकी अधिकारी से भास्कर ने पूरे मामले को समझा। उन्होंने बताया कि मास्टर प्लान 2031 का प्रारूप 2013 में जारी हुआ। उसी के मुताबिक 2017 में सेक्टर प्लान बना। दोनों में मामूली अंतर आ सकता है, लेकिन किसान 150 से 200 फिट जगह बदलने की बात कह रहे हैं, उसमें किसी तरह की सच्चाई नहीं हो सकती। जबकि किसानों के अनुसार 2013 के मास्टर प्लान से हटकर सेक्टर प्लान में बदलाव किया, उसी से गड़बड़ी हुई। इधर, यूआईटी एईएन रघुनाथ प्रसाद सैनी ने बताया कि किसानों की सहमति के बाद 70 फीसदी किसानों को मुआवजा जारी किया गया है, शेष 30 फीसदी भूमि अवाप्ति की कार्रवाई की जा रही है। इनको भी अवॉर्ड जारी होगा। जेपी गौड़, यूआईटी सचिव

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