आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में किसानों को खेती और पशुपालन के लिए बैंकों से ज्यादा लोन मिल सकेगा। जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई जिला स्तरीय तकनीकी समिति की बैठक में अल्पकालीन फसली लोन और कार्यशील पूंजी के वित्तीय मापदंडों में वृद्धि की अनुशंसा की गई। इस बैठक में वर्ष 2026-27 के लिए बैंकों द्वारा दिए जाने वाले लोन की सीमा तय की गई। जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा ने बताया कि इस निर्णय से जिले के किसानों को खाद-बीज और अन्य कृषि कार्यों के लिए बैंकों से पर्याप्त पूंजी मिल सकेगी। इससे उन्हें अपनी पैदावार बढ़ाने में मदद मिलेगी। समिति ने बढ़ती लागत को देखते हुए विभिन्न फसलों के लिए निर्धारित वित्तीय मापदंडों को बढ़ाने का प्रस्ताव दिया। इसके अतिरिक्त पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए दी जाने वाली कार्यशील पूंजी के मापदंडों में भी वृद्धि प्रस्तावित की गई है। विशेष रूप से मधुमक्खी पालन के लिए भी लोन सीमा बढ़ाने की अनुशंसा की गई है। इस कदम से मधुमक्खी पालन से जुड़े किसानों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। बैठक में जिले के प्रगतिशील किसानों ने भी हिस्सा लिया और खेती-किसानी में आ रही व्यावहारिक लागतों के आधार पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए। इस दौरान विभिन्न बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी, कृषि विभाग, पशुपालन विभाग और मत्स्य विभाग के अधिकारी भी उपस्थित रहे।


