पाली जिले के रोहट क्षेत्र के ढाबर गांव में सोमवार को किसानों ने सिंचाई विभाग के XEN शंकरलाल को घेर लिया। वे सरदारसमंद बांध से निकलने वाली नहर के टेल तक 63 दिन बाद भी पहली पाण का पानी नहीं पहुंचने से नाराज थे। नाराज किसानों ने एक्सईएन की गाड़ी को घेर लिया। ऐसे में वे गाड़ी छोड़कर पैदल चले गए। बाद में रोहट तहसीलदार प्रकाश पटेल, रोहट थानाप्रभारी पदम पाल सिंह मौके पर पहुंचे और समझाइश कर किसानों को शांत किया। दरअसल सरदारसमंद बांध से नहर के टेल तक 63 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पहली पाण का पानी खेतों तक नहीं पहुंचने से नाराज किसानों ने सोमवार को ढाबर में नहर के पास ही बैठकर प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि पानी नहीं पहुंचने के कारण उनकी फसलें खराब हो रही है।
किसानों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग की। दोपहर डेढ़ बजे किसानों को सूचना मिली कि एक्सईएन शंकरलाल राठौड़ व जेईएन विमला चौधरी मौके पर आ रहे हैं तो किसान वापस नहर की तरफ लौट गए। अफसरों से बातचीत पर बहस बढ़ी तो किसान उच्च अधिकारियों को बुलाने की मांग पर अड़ गए। एक्सईएन की गाड़ी के आगे बैठ गए किसान
किसान एक्सईएन राठौड़ की सरकारी गाड़ी के आगे बैठ गए। ऐसे में एक्सईएन गाड़ी मौके पर छोड़ पैदल ही निकल गए। तहसीलदार प्रकाश पटेल और पुलिस भी मौके पर पहुंची। किसान किरण सिंह ने बताया कि प्रशासन और किसानों के बीच 5 दिन में टेल तक पानी पहुंचाने की बात पर सहमति बन गई है।
रोहट तहसीलदार प्रकाश पटेल ने बताया कि बराबर निगरानी रखकर पानी पहुंचाएंगे।
बता दे कि 24 नवंबर को 40 ट्रैक्टर लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे किसान। उस समय 3 दिन में टेल तक पानी पहुंचाने का भरोसा दिया था। मामला क्या है?
सरदारसमंद बांध से 18 गांवों के लगभग 63,757 बीघा फसल प्रभावित है। इससे किसान नाराज हैं। किसानों का सवाल है कि जब बांध छलक रहा है और पानी उपलब्ध है तो आखिरी खेत तक पानी क्यों नहीं पहुंचा? किसान तुरंत टेल तक पानी पहुंचाने का भरोसा चाहते है। उनका आरोप है कि नहर सफाई और निगरानी में पारदर्शिता नहीं बरती गई है। किसानों ने खुद निगरानी टीम बनाई, लेकिन अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी न होने के कारण परिणाम नहीं निकला। 03 दिसंबर को एसडीएम कार्यालय में बैठक में 10 ग्रामीणों को निगरानी टीम में नामित किया गया। इसलिए आ रही परेशानी
नहरों की ढंग से सफाई नहीं होने के कारण नहर के टेल तक के गांवों में सिंचाई के लिए पानी नहीं पहुंच पा रहा है। नामित निगरानी टीम बनी, फिर भी लेकिन उसका प्रभावी उपयोग नहीं किया गया। जवाबदेही की कमी भी है। स्टाफ की कमी से भी निगरानी व साफ-सफाई का कार्य सही तरीके से नहीं हो रहा। 04दिसंबर को टीम ने काम शुरू किया, लेकिन टेल तक पानी नहीं पहुंचा। जिसका सीधा नुकसान किसानों को हो रहा है। खेतों में खड़ी फसलों को समय पर पर्याप्त पानी नहीं मिलेगा तो फसलें खराब हो जाएगी। उत्पादन कम होने से किसानों को नुकसान होगा।


