किसान खेत में नाले से चोरी कर रहे गंदा पानी:सीवरेज के गंदे व केमिकलयुक्त पानी से हो रही खेती, 50 हैक्टेयर में जीरा, सरसों व सब्जियों की बुवाई

बाड़मेर शहर से निकलने वाले गंदे पानी से किसान हर साल लाखों रुपए की फसल उगा रहे हैं। शहर से मात्र 5 किमी दूर कुड़ला गांव में 50 हेक्टेयर से अधिक जमीन पर गंदे पानी से जीरा, सरसों व सब्जियों की खेती कर रहे हैं। इन किसानों द्वारा इस पानी से इंजन लगाकर फव्वारे चलाए जा रहे हैं। बिना कुंए, ट्यूबवैल और नहर के किसान खेती कर रहे हैं। शहर के संपूर्ण सीवरेज के गंदे पानी की निकासी के लिए कुड़ला गांव में लगे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तक सीवरेज का नाला बनाया गया है। जहां पर शहरभर का गंदा पानी एकत्रित होता है इन दिनों कुड़ला गांव के खेतों के किसानों ने सीवरेज के नाले को भी क्षतिग्रस्त कर गंदे पानी का स्टोरेज करना शुरू कर दिया। शहर के पास 7 साल से गंदे व केमिकल युक्त पानी से खेती कर रहे किसान, कार्रवाई नहीं शहर से 5 किमी दूर कुड़ला गांव में नगर परिषद का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बना हुआ है। लंबे समय से यह प्लांट बंद होने के कारण पूरे शहर का गंदा पानी इस ट्रीटमेंट प्लांट की बनी डिग्गियों में जमा हो रहा है। सीवरेज का गंदा पानी से भरे इन डिग्गियों में आस-पास में रहने वाले किसान नाले बनाकर या पाइप डालकर खेतों में ​कच्ची डिग्गियां बनाकर स्टोरेज कर रहे हैं। जहां से इंजन, मोटर लगाकर फव्वारे चला कर वहां के किसान फसल ले रहे हैं। सीवरेज के गंदे, बदबूदार और केमिकल युक्त पानी को किसान सीधे सीवरेज लाइन को तोड़कर अपने खेतों में ले रहे हैं। सीवरेज लाइन से मिट्टी के नाले बनाकर एक खेत से दूसरे खेत तक ले जा रहे हैं। जिसके कारण कई किसान सीवरेज के इस बदबूदार और केमिकलयुक्त पानी से खेती कर रहे हैं। गर्मियों में किसान खुद परेशान, अब उगा रहे फसलें, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ाने की जरूरत कुड़ला के आसपास के क्षेत्र में गंदा पानी भरा हुआ है, इससे वहां के लोगों का जीना भी मुश्किल हो गया है। गर्मियों में मच्छरों की संख्या ज्यादा होने से बिना मच्छरदानी यहां सोना भी संभव नहीं होता है। वहीं किसानों और उनके परिवारजनों को कई तरह की बीमारियों का शिकार होना पड़ता है। सर्दियों में यही किसान इस गंदे पानी को अपने खेत में बनी डिग्गी में स्टोरेज कर इससे खेती कर लाखों रुपए कमाते हैं। कुड़ला गांव में नगर परिषद द्वारा 8 करोड़ की लागत से 4.8 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तैयार किया गया। लेकिन जलभराव क्षेत्र में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट ​का निर्माण होने के कारण बारिश के दिनों में यह प्लांट पूरी तरह से पानी से भर जाता है। इसकी क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। “कुड़ला के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तक जाने वाले गंदे और केमिकलयुक्त पानी से हो रही खेती को रोकने के प्रयास किए जाएंगे। जल्द ही सीवरेज लाइन को तोड़कर गंदे पानी की चोरी करने वाले इन किसानों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।” -श्रव​णसिंह राजावत, आयुक्त, नगरपरिषद बाड़मेर “केमिकलयुक्त पानी से की जा रही खेती के कारण बाजार में आ रही सब्जियां, जीरे के कारण आमजन में टाइफाइड, पीलिया, उल्टी, दस्त, डायरिया की बीमारी होने की संभावना रहती है।” -डॉ. मोतीलाल खत्री,​ अस्पताल बाड़मेर

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