जालोर में प्रस्तावित नेशनल हाईवे कॉरिडोर को लेकर किसानों में आक्रोश है। उनका कहना है कि किसानों की खातेदारी की जमीन के अधिग्रहण के बदले मुआवजे में दी जा रही वर्तमान डीएलसी दरें बहुत कम हैं। ऐसे में किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। किसानों ने डीएलसी दर की जगह 20 गुना मुआवजा मांगा है। मामला जिले की भाद्राजून तहसील के ग्राम बरवा का है। यहां से गुजरने वाले प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग जयपुर–किशनगढ़–अजमेर–जोधपुर–अमृतसर–जामनगर कॉरिडोर का विरोध हो रहा है। मंगलवार को बरवा के ग्रामीण जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर खातेदारी भूमि के अधिग्रहण पर आपत्ति जताई। उचित मुआवजे के साथ अन्य सुविधाओं की मांग की गई। दरें कम, भरपाई संभव नहीं ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया- केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की अधिसूचना (9 दिसंबर 2025) के तहत बरवा गांव में जमीन अधिग्रहण किया जा रहा है। गांव की वर्तमान डीएलसी दरें अत्यंत कम हैं। ऐसे में अगर इन्हीं दरों पर भूमि अधिग्रहण किया गया तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा, जिसकी भरपाई संभव नहीं होगी। ऐसे में वर्तमान डीएलसी दर के स्थान पर खातेदारों को बीस गुना दर से मुआवजा दिया जाए। ये संभव न हो तो अधिग्रहण की गई भूमि के बदले उपजाऊ भूमि दी जाए। जिन खातेदारी खसरों के बीच से राजमार्ग निकलेगा, वहां किसानों की सुविधा के लिए अंडरब्रिज बनाए जाएं। ताकि खेतों में आवाजाही सुचारु रहे। बरवा गांव के अधिकांश किसान पहले से ही आर्थिक रूप से कमजोर हैं। उनकी उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण होने से आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।


