किसी का कृतघ्न हो जाना ऐसा पाप है जिसका कोई प्रायश्चित नहीं: तिवारी

भास्कर न्यूज| महासमुंद स्थानीय त्रिमूर्ति कॉलोनी स्थित शिव मंदिर के पास आयोजित संगीतमय शिव महापुराण कथा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। गुरूवार को कथा के दौरान आचार्य पंडित पंकज तिवारी ने त्रिपुरासुर वध के प्रसंग का वर्णन करते हुए धर्म, कर्तव्य और मर्यादा के महत्व पर गहरा प्रकाश डाला। आचार्य तिवारी ने कहा कि शास्त्रों में लगभग हर पाप के लिए प्रायश्चित का विधान है, लेकिन कृतघ्नता (उपकार को न मानना) एक ऐसा घोर पाप है जिसका कोई प्रायश्चित नहीं है। उन्होंने बताया कि धर्म, परिवार की मर्यादा और सौंपे गए दायित्वों से विमुख होना ही कृतघ्नता है। शास्त्रों के अनुसार, कृतघ्न व्यक्ति को मृत्युदंड तक दिया जा सकता है। ब्रह्महत्या और गौ-हत्या जैसे पापों के लिए भी कठिन प्रायश्चित बताए गए हैं, लेकिन कृतघ्नता अक्षम्य है। कथा के दौरान त्रिपुरासुर (तारकाक्ष, विद्युनमाली और कमलाक्ष) के उद्धार की कथा सुनाते हुए बताया गया कि उन्हें ब्रह्मा जी से दुर्लभ वरदान प्राप्त था। वे तभी मर सकते थे जब वे धर्म के मार्ग से भटक जाएं। भगवान शिव ने शुरुआत में उन्हें मारने से इनकार कर दिया था क्योंकि वे सनातन धर्म का पालन कर रहे थे। जब भगवान विष्णु की माया और नारद जी के हस्तक्षेप से वे पथभ्रष्ट हुए और अपनी इंद्रियों के सुख में डूबकर धर्म त्याग दिया, तब वे वध के योग्य बने। अंततः भगवान शिव ने विश्वकर्मा के निर्मित दिव्य रथ पर सवार होकर, पुष्य नक्षत्र के संयोग में एक ही प्रहार से तीनों लोकों (त्रिपुर) का विनाश किया। इस मौके पर पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष राशि त्रिभुवन महिलांग, पार्षद शुभ्रा मनीष शर्मा, ओंकार पटेल, रामेश्वर बरिहा सहित अन्य मौजूद थे।

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