फलोदी में कुरजां महोत्सव की पूर्व संध्या पर गुरुवार शाम ऐतिहासिक फलोदी दुर्ग में भव्य दीपदान कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला प्रशासन और नगर परिषद की संयुक्त पहल पर आयोजित इस सांस्कृतिक आयोजन में बड़ी संख्या में शहरवासियों ने सहभागिता की। यह दीपदान कार्यक्रम हर साल की तरह कुरजां पक्षियों के आगमन की प्रतीक्षा और स्वागत के प्रतीक रूप में मनाया गया। कलेक्टर और एसडीएम ने किया दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम का शुभारंभ जिला कलेक्टर श्वेता चौहान और एसडीएम पूजा चौधरी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान विशेष रूप से महिलाओं और युवतियों की सक्रिय और उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। दीपों की कतारों से पूरा दुर्ग परिसर सुनहरी रोशनी में नहाता नजर आया। दुर्ग की सजावट और कुरजां थीम बना आकर्षण कुरजां महोत्सव के तहत दुर्ग को बिजली की रंगीन लड़ियों से सजाया गया था। पीली रोशनी में नहाया किला अपने ऐतिहासिक स्वरूप में बेहद भव्य दिखाई दे रहा था। दुर्ग के विभिन्न हिस्सों में कुरजां पक्षियों की आकृतियाँ उकेरी गईं, जो लोगों के लिए मुख्य आकर्षण बनीं। महल के सामने बनाई गई विशाल रंगोली, जिसमें कुरजां का चित्र उकेरा गया था, कार्यक्रम का केंद्र बिंदु रही। जलते दीपकों की मनमोहक आभा ने इसकी सुंदरता को और निखार दिया। शहरवासियों को मिला महोत्सव का निमंत्रण दीपदान में शामिल प्रतिभागियों को दो दिवसीय कुरजां महोत्सव में आने के लिए पीले चावल देकर आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों की मौजूदगी रही, जिसने इस आयोजन को और भी विशेष बना दिया। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता रही। सीआई भंवराराम अपनी टीम के साथ दुर्ग परिसर में तैनात रहे। दीपदान केवल दुर्ग तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि राणीसर तालाब और खींचन स्थित रातरी नाड़ी तालाब पर भी दीपदान के कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्थानीय लोगों ने इन आयोजनों के दौरान फलोदी की आराध्य देवी मां लटियाल का जयघोष किया और शहर के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।


