जोधपुर जिला कोर्ट ने पुरानी रंजिश के चलते एक युवक को घेरकर कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला करने वाले 3 आरोपियों को सजा सुनाई गई है। आरोपियों ने इतनी क्रूरता से मारा था कि युवक के खोपड़ी की हड्डी तोड़कर दिमाग में धंसा दी थी। यहां तक कि उनके खिलाफ गवाही देने वाले व्यक्ति की भी हत्या कर दी थी, जिसका मामला भी कोर्ट में चल रहा है। अपर सत्र न्यायाधीश (जोधपुर जिला) नेहा शर्मा ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद 9 साल पुराने इस मामले में तीनों दोषियों को हत्या का प्रयास के तहत 7-7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अपने फैसले कहा- ‘समाज में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसे गंभीर अपराधों में नरमी बरतना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ होगा।’ सरकारी वकील मयंक रांकावत ने बताया- मामले में रमजान खां, उम्मेद अली खां और रहमततुला खां को दोषी मानते हुए सजा सुनाई गई है। कोर्ट में दोनों पक्षों की दलील 1- कुल्हाड़ी, सरिए और लाठियां लेकर टूट पड़े थे हमलावर घटना 4 सितंबर 2017 की है, जो किसी थ्रिलर फिल्म के दृश्य जैसी थी। परिवादी बरकत अली और पीड़ित मेऊदीन अपनी बोलेरो कैंपर गाड़ी से सिन्धीपुरा से नाथुनगर जा रहे थे। तभी पीपाड़ थाना क्षेत्र में बगड़की गांव के मोड़ पर आरोपियों ने एक पूर्व नियोजित साजिश के तहत उन्हें घेर लिया था। पीछे से एक बिना नंबर के ट्रैक्टर ने उन्हें दौड़ाया और आगे से एक सिल्वर बोलेरो ने रास्ता ब्लॉक कर दिया था। गाड़ियां रुकते ही आरोपी हाथों में कुल्हाड़ी, सरिए और लाठियां लेकर “मार दो-मार दो” चिल्लाते हुए उन पर टूट पड़े थे। 2- खोपड़ी की हड्डी तोड़कर दिमाग में धंसा दी थी हमले की क्रूरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आरोपियों ने सीधे पीड़ित के सिर को निशाना बनाया था। हमले में मेऊदीन के सिर पर कुल्हाड़ी के गहरे वार लगे थे। अभियोजन पक्ष की ओर से गवाही देते हुए न्यूरोसर्जन डॉ. सुनील गर्ग ने कोर्ट को बताया कि पीड़ित को ‘डिप्रेस फ्रेक्चर’ हुआ था। सिर की हड्डी टूटकर दिमाग के अंदर धंस गई थी। जान बचाने के लिए डॉक्टरों को तत्काल ‘क्रेनियोटॉमी’ सर्जरी करनी पड़ी थी। कोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट को आधार मानते हुए कहा कि सिर के वाइटल पार्ट पर कुल्हाड़ी से वार करना यह साबित करता है कि हमलावर की मंशा जान लेने की थी। 3- समझौता नहीं किया तो गवाह को उतार दिया मौत के घाट केस का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा था कि आरोपी वारदात के बाद भी नहीं रुके थे। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपियों ने पीड़ित पक्ष पर राजीनामा करने का भारी दबाव बनाया था। जब पीड़ित पक्ष नहीं झुका तो आरोपियों ने 22 मई 2019 को उन पर दोबारा हमला किया था। हमले में बीच-बचाव करने आए गवाह ‘भाई खां’ की हत्या कर दी गई थी। गवाह की हत्या का यह अलग मामला अभी भी कोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट ने माना कि आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड और गवाहों को डराने-धमकाने का उनका तरीका यह दर्शाता है कि वे आदतन अपराधी हैं। आरोपियों के वकील की दलील, हमला नहीं, एक्सीडेंट बताया आरोपियों की ओर से वकील ने कोर्ट में दलील दी कि यह हमला नहीं बल्कि एक एक्सीडेंट था। उन्होंने बताया कि घटना के बाद आरोपी उम्मेद अली ने भी पुलिस में एक क्रॉस-केस दर्ज करवाया था, जिसमें दावा किया गया था कि मेऊदीन ने उनकी गाड़ी को टक्कर मारी थी। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि एफआईआर 25 घंटे की देरी से दर्ज कराई गई, जो संदेह पैदा करती है। हालांकि, कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। न्यायाधीश नेहा शर्मा ने अपने फैसले में लिखा कि घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाना पहली प्राथमिकता होती है, इसलिए एफआईआर में देरी स्वाभाविक है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कुल्हाड़ी से लगे घाव सड़क दुर्घटना में नहीं आ सकते, इसलिए क्रॉस-केस की कहानी मनगढ़ंत है। आरोपियों पर जुर्माना भी लगाया अदालत ने तीनों दोषियों पर कुल मिलाकर 47,250 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने आदेश दिया कि जुर्माने की यह पूरी राशि पीड़ित मेऊदीन को बतौर मुआवजा दी जाएगी, ताकि उसके इलाज और मानसिक संताप की कुछ भरपाई हो सके। परिवादी के अधिवक्ता आर.के. मेहर ने फैसले पर संतोष जताते हुए इसे न्याय की जीत बताया है।


