कृत्रिम बुद्धिमत्ता न्यायिक कार्य में सहायक:न्यायमूर्ति सिंह

अंतिम व 5वें सत्र में ‘न्यायिक निर्णयों की गुणवत्ता सुधार: उभरती और भावी तकनीकें’ विषय पर चर्चा हुई। न्यायमूर्ति एन कोटिस्वर सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता न्यायिक कार्य में सहायक हो सकती है। लेकिन इसे हमेशा मानवीय विवेक, विधिक तर्क और संवैधानिक मूल्यों के अधीन रहना चाहिए। न्यायमूर्ति मनमोहन ने लंबित मामलों की चुनौती का उल्लेख करते हुए कहा कि उभरती तकनीक यदि जिम्मेदारी पूर्वक अपनाई जाएं तो न्यायालयों की दक्षता और निर्णय गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार ला सकती हैं। डीप फेक और एआई जनित सामग्री से जुड़े जोखिमों पर चर्चा करते हुए न्यायमूर्ति अनूप चितकारा ने बताया कि ऐसी तकनीक साक्ष्य की विश्वसनीयता और जन विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने मेटा डाटा विश्लेषण की महत्ता भी प्रदर्शित की। न्यायमूर्ति राजेश बिंदल ने कहा कि तकनीक अपनाने के साथ‑साथ सावधानी, निरंतर निगरानी और संस्थागत समर्थन आवश्यक है। उन्होंने राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के माध्यम से फॉरेंसिक क्षमता और तकनीकी दक्षता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। भास्कर न्यूज| जैसलमेर राजस्थान उच्च न्यायालय और राजस्थान राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के सहयोग से ‘तकनीक के माध्यम से विधि के शासन को सुदृढ़ करना: चुनौतियां और अवसर’ विषय पर जैसलमेर में आयोजित वेस्ट ज़ोन रीजनल कॉन्फ्रेंस के दूसरे व अंतिम दिन न्याय प्रणाली के सामने उभर कर आ रही तकनीकी चुनौतियों पर विस्तृत विचार‑विमर्श हुआ। कॉन्फ्रेंस के चौथे सत्र में साइबर अपराध और डिजिटल फॉरेंसिक पर चर्चा करते हुए न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानतुल्लाह ने न्याय प्रणाली में डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अपनाने में हिचकिचाहट दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध सीमाहीन होते हैं और अक्सर गंभीर तथा अपूरणीय क्षति के बाद ही सामने आते हैं। उन्होंने डिजिटल फॉरेंसिक, आधुनिक जांच तकनीकों, क्षेत्राधिकार संबंधी जटिलताओं, मध्यस्थों की वैधानिक जिम्मेदारियों, ई-साक्ष्य मैनेजमेंट रूल्स की प्रासंगिकता तथा एआई‑जनित सामग्री से उत्पन्न चुनौतियों पर प्रकाश डाला। राजस्थान के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने दो दिनों की व्यापक चर्चाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि न्याय प्रणाली में तकनीकी प्रगति को समावेशी, नैतिक और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित रखना सभी संस्थाओं की सामूहिक जिम्मेदारी है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि तीव्र तकनीकी परिवर्तन के दौर में न्यायपालिका की अनुकूलन क्षमता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि तकनीक दक्षता बढ़ा सकती है, लेकिन उसे न्याय का विकल्प नहीं, बल्कि उसका साधन ही रहना चाहिए। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा ने कहा कि साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में न्यायाधीशों के लिए सतत सीखना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि ऐसे अपराध व्यक्तियों को वास्तविक हानि पहुंचाते हैं। सम्मेलन का समापन विदाई समारोह के साथ हुआ। राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं राजस्थान राज्य न्यायिक अकादमी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति डॉ. पुष्पेंद्रसिंह भाटी ने धन्यवाद प्रस्तुत किया और सभी प्रतिभागियों तथा आयोजक संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ सम्मेलन का औपचारिक समापन हुआ।

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