प्रदेश में श्रमिकों का रुझान अब कृषि के बजाय निर्माण जैसे असंगठित और सक्रिय क्षेत्र की ओर अधिक है। कुल पंजीकरण की संख्या में पिछले साल के मुकाबले कमी के बावजूद निर्माण कार्यों में असंगठित श्रमिक ज्यादा रोजगार तलाश रहे हैं। पिछले दो सालों में इनकी संख्या में 48 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। जबकि कृषि सेक्टर और कपड़ा उद्योग में इसमें गिरावट दर्ज की गई है। फरवरी 2024 से फरवरी 2026 के बीच ई–श्रम पोर्टल पर अलग-अलग क्षेत्रों की स्थिति काफी उतार-चढ़ाव वाली रही है। जहां फरवरी 2024-25 के दौरान कुल पंजीकरण 9.24 लाख से अधिक हुए, वहीं फरवरी 2025-26 के दौरान यह संख्या घटकर लगभग 7.77 लाख रह गई है। मुख्य रूप से कृषि और टेक्सटाइल इंडस्ट्री में ज्यादा कमी दर्ज की गई है। संसद में दी गई जानकारी के अनुसार पिछले वर्ष कृषि क्षेत्र में 4.83 लाख श्रमिकों ने पंजीकरण कराया था, वहीं इस वर्ष यह आंकड़ा गिरकर 3.44 लाख पर आ गया। वस्त्र उद्योग में भी पंजीकरण की रफ्तार धीमी हुई है, जो 87 हजार से घटकर 55 हजार के करीब आ गई है। वहीं, सबसे ज्यादा रोजगार निर्माण क्षेत्र में पा रहे हैं। पिछले एक साल में निर्माण कार्यों में श्रमिकों की रुचि तेजी से बढ़ी है। फरवरी 2024-25 में जहां इस क्षेत्र में 1.35 लाख रजिस्ट्रेशन हुए थे, वहीं फरवरी 2025-26 में यह संख्या 2 लाख से पार हो गई है। इसका कारण सरकारी व गैर सरकारी परियोजनाओं और रियल एस्टेट में तेजी और तत्काल मजदूरी मिल जाना है। दूसरी ओर घरेलू कामगारों में भी इस वर्ष गिरावट दर्ज की गई है, जो 28 हजार से घटकर करीब 17 हजार हुई है। अन्य श्रेणियों में भी पंजीकरण 61 हजार से कम होकर 51 हजार के आसपास सिमट गया है। पंजीकरण को लेकर श्रमिकों में जागरूकता भी आई है। आंकड़ों के अनुसार अधिकांश ने खुद पंजीकरण करवाया है। इसके बाद कॉमन सर्विस सेंटर की मदद लेने वाले श्रमिक हैं। इनमें सर्वाधिक 69 प्रतिशत महिला श्रमिक हैं। जबकि 30% के करीब पुरुष हैं। 80 प्रतिशत से ज्यादा श्रमिक 18 से 40 आयु वर्ग के हैं। एक ही जगह समाधान, 14 योजनाओं का फायदा असंगठित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का फायदा दिलाने के लिए ई–श्रम पोर्टल शुरू किया गया था। इस पर अब तक राजस्थान के डेढ़ करोड़ से ज्यादा श्रमिकों ने पंजीकरण करवाया है। इसके जरिए 14 सरकारी योजनाओं का लाभ उठाया जा सकता है। जिनमें स्ट्रीट वेंडर्स, बीमा योजना, मनरेगा, आवास योजना, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, वन नेशन वन राशन कार्ड और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना आदि शामिल हैं।


