2026 के आम बजट में केंद्र सरकार ने नई स्कीमों का ऐलान किया है। युवाओं के स्किल्स बढ़ाने के साथ देश को मेडिकल का हब बनाने पर फोकस की बात कही जा रही हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बजट से इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में मजबूती मिलेगी। हालांकि कुछ लोग कहते हैं कि बजट उम्मीदों पर खरा नही उतरा, बजट में बड़ी रियायत मिलने की आस थी पर झटका मिला। IT स्लैब में भी कोई बदलाव नहीं हुआ। दैनिक भास्कर ने लखनऊ के चुनिंदा लोगों से जाना कि आखिर इस बजट में क्या कुछ है विशेष… लखनऊ के डॉ.शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजय सिंह कहते हैं कि बजट में वृद्धजनों को केयर गिवर का प्रावधान दिया गया है। ये कदम हर लिहाज से आने वाले समय मे मील का पत्थर साबित हैं। आज भारत दुनिया के यंग माइंडस का घर है, पर कुछ सालों बाद जब यही आबादी सीनियर सिटीजन की केटेगरी में आएगी तो उनके लिए ये कदम गहम साबित होगा। इसके अलावा भी बजट में कुछ ऐसी बातें हैं, जिसे लांग टर्म गेन के रूप में देखा जा सकता है। ये सही है कि सामान्य तौर पर इसे लोक लुभावन बजट नहीं कहा जा सकता है, पर एक्सपर्ट इसके बिग इम्पैक्ट को भी नकार नहीं सकते हैं।
साइंस और टेक्नोलॉजी पर बजट का फोकस साफ दिख रहा है। देश के स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बढ़ते कदम दुनियाभर के लिए मिसाल हैं। भारत आने वाले सालों में ग्लोबल लीडर बनने जा रहा है। वो ये भी कहते हैं कि दिव्यांगजनों के लिए भी इस बजट में कई घोषणाएं हुई है। मकसद उन्हें मेनस्ट्रीम में लेकर आना है। वो देश की तरक्की में अपना योगदान नदी सके। इस लिहाज से भी ये घोषणाएं अहम साबित होगी।
समर्थ और समृद्ध भारत की दिशा में अहम कदम लखनऊ के मूल निवासी और ऋषिकेश के मायाकुंड स्थिति श्रीभरत मिलाप आश्रम के आचार्य नारायण दास कहते हैं कि
भारत के आर्थिक क्षितिज पर वर्ष 2026 का केन्द्रीय बजट केवल एक साधारण वित्तीय लेखा-विवरण नहीं, अपितु ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना को मूर्त रूप देने वाला एक सुदृढ़ आधार-स्तम्भ है। इस बजट की आत्मा आर्थिक अनुशासन और आधुनिक राष्ट्रीय आकांक्षाओं के समन्वय में निहित है। एक ओर सरकार ने राजकोषीय घाटे को 4.3% की मर्यादित सीमा में नियन्त्रित किया है, वहीं दूसरी ओर आधारभूत संरचना के लिए आवंटित विशाल पूंजी देश की प्रगति को तेज गति प्रदान करेगी।
सेमीकंडक्टर और बायो-फार्मा जैसे उदीयमान और रणनीतिक क्षेत्रों पर विशेष बल यह स्पष्ट संकेत देता है कि भारत अब मात्र उपभोग का बाजार नहीं, बल्कि नवाचार, अनुसंधान और निर्माण का वैश्विक केन्द्र बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
यह बजट क्षणिक लोक-लुभावन आश्वासनों के मोहजाल से मुक्त होकर दूरगामी और स्थायी परिणामों पर केन्द्रित है। सुदृढ़ बैंकिंग व्यवस्था, सुलभ और समावेशी प्रौद्योगिकी के साथ ये आत्मनिर्भर, समर्थ और समृद्ध भारत की दिशा में अहम कदम हैं। नए वेतनमान की चर्चा न होने से निराशा राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष सत्य शंकर मिश्र कहते है कि बजट 2026 को लेकर बड़ी निराशा हुई हैं। उम्मीद थी कि इस बार के बजट में शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था पर सरकार जरूर ध्यान देगी पर 7% की बढ़ोतरी को दिखाकर झुनझुना थमा दिया गया है। बजट बढ़ाने के साथ मिस मैनेजमेंट को दूर करना था जो नहीं हुआ मात्र पैसा बर्बाद किया जा रहा है ना तो प्रशासनिक प्रबंधन है सही और ना ही वित्तीय प्रबंधन। जब से डिजिटलाइजेशन आ गया है तब से लोगों के अंदर एक होड़ सी मच गई है कि सब को इंजीनियर बना दो सबको डॉक्टर बना दो। चारित्रिक शिक्षा की कोई बात नहीं करता। एक और समस्या पैदा हो गई स्कूलों में इन्होंने रोजगार परक शिक्षा बनाने के उद्देश्य से विद्यालय में कौशल विकास पर बहुत ध्यान दिया है किंतु शिक्षकों की व्यवस्था उनके नियमित पाठ्यक्रम की व्यवस्था पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। महत्वपूर्ण विषयों के पद खाली है जो शिक्षक हैं भी विभाग ने उन्हें दूसरे काम दे रखे हैं। विद्यालयों की स्थिति बहुत दयनीय है पहले उनके इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारा जाए ,शिक्षकों को उपलब्ध कराया ताकि छात्र बुनियादी शिक्षा प्राप्त कर सकें। विद्यालयों के अंदर पठन-पाठन को डिस्टर्ब ना किया जाए किया। इन व्यवस्थाओं से पर रोक लगानी होगी। नैतिक शिक्षा की तो कोई चर्चा ही नहीं करता है सबको वैज्ञानिक बनाना है। बेहतर होता सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता ।अच्छे छात्र तैयार किए जाएं जिससे अच्छा समाज तैयार हो। आठवें वेतनमान की तो चर्चा भी नहीं की गई है सभी शिक्षक कर्मचारी निराश है।


