जयपुर में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा- आने वाले समय में ग्रीन एनर्जी का सबसे बड़ा केंद्र राजस्थान बनने जा रहा है। उन्होंने कहा- दुबई और यूएई को बिजली देने के लिए 1600 किलोमीटर की अंडर-सी केबल बिछाने का काम शुरू हो चुका है। इस पर करीब 40 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस लाइन के जरिए इन दोनों देशों को भी भारत बिजली भेज सकेगा। उन्होंने कहा- केंद्र सरकार का 115 गीगावॉट का केंद्रीय ट्रांसमिशन नेटवर्क सिर्फ राजस्थान में तैयार किया जा रहा है। यह सीधा संकेत है कि आने वाले दशक में भारत का एनर्जी सुपर हाईवे इसी राज्य से निकलेगा। राजस्थान के पास 141 गीगावॉट सोलर और 283 गीगावॉट विंड का पोटेंशियल है, जो देश में सबसे अधिक है। जयपुर के सीतापुरा स्थित जेईसीसी में बुधवार को आयोजित प्रवासी राजस्थानी दिवस के दौरान केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने यह कहा। उन्होंने कहा- जिस समय भारत में सूर्योदय होगा, उसी समय राजस्थान की सौर ऊर्जा से बिजली पश्चिमी देशों में सप्लाई होने लगेगी। देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में ऊर्जा सेक्टर की सबसे बड़ी भूमिका
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा- भारत में सूरज जल्दी निकलता है, जबकि पश्चिम के देशों में देर से उगता है। यही वजह है कि भारत में सुबह मिलने वाली सौर ऊर्जा को उन देशों तक पहुंचाने की योजना तैयार की जा रही है। भौगोलिक तौर पर भले ही देश में सूर्यास्त राजस्थान में होता है, लेकिन भविष्य में ग्रीन एनर्जी का सूरज इसी धरती से निकलेगा। खट्टर ने कहा- राजस्थान की जमीन, मौसम और सोलर क्षमता इतनी बड़ी है कि यहां बनने वाली ऊर्जा पूरे देश को मजबूत करने के साथ दुनिया तक भेजने की तैयारी पहले ही शुरू हो चुकी है। राजस्थान की तपती रेत आज राज्य की सबसे बड़ी ताकत बन रही है। सूर्य की तेज रोशनी और गर्मी को ग्रीन एनर्जी में बदलकर देश और दुनिया का बड़ा पावर सेंटर बनने की दिशा में राजस्थान तेजी से आगे बढ़ रहा है। मंत्री खट्टर ने कहा- देश को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में ऊर्जा सेक्टर की सबसे बड़ी भूमिका है। “सूर्य से सूर्य तक” का एनर्जी चक्र तैयार कर रहा भारत
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा- भारत हवा, पानी, सूर्य और न्यूक्लियर हर सोर्स से बिजली बनाने की दिशा में काम कर रहा है और देश “सूर्य से सूर्य तक” का एनर्जी चक्र तैयार कर रहा है। दुनिया में पॉल्यूशन रोकने के लिए कार्बन उत्सर्जन कम करने का टारगेट तय किया गया था। भारत ने 2005 के स्तर के मुकाबले 2030 तक 45% कार्बन कटौती और 50% रिन्युएबल एनर्जी हासिल करने का लक्ष्य सेट किया था। भारत इन दोनों टारगेट्स को 2025 में ही पूरा कर चुका है। यह बताता है कि देश ऊर्जा क्षेत्र में कितनी तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत 10 साल में पावर डेफिसिट से सरप्लस हुआ, अब एक्सपोर्ट की स्थिति में
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा- वर्ष 2014 में भारत में 5% पावर डेफिसिट रहता था, जिसके कारण कई जगह पावर कट लगाने पड़ते थे। वहीं 10 साल में देश पावर सरप्लस की स्थिति में पहुंच गया है। अब भारत बिजली एक्सपोर्ट करने लगा है। उन्होंने बताया- पिछले साल देश ने 250 गीगावॉट की पीक डिमांड पूरी की थी। इस साल अनुमान था कि मांग 267 गीगावॉट तक जा सकती है, लेकिन मौसम अनुकूल होने से यह 248 गीगावॉट पर ही रुकी रही। खट्टर ने कहा- ग्रीन एनर्जी में वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट का टारगेट सेट किया गया है। भारत अभी ग्रीन और अन्य रिन्युएबल एनर्जी को मिलाकर 505 गीगावॉट क्षमता तक पहुंच चुका है। राजस्थान का सोलर-विंड पोटेंशियल देश में सबसे बड़ा
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा- सबसे बड़ी चुनौती ट्रांसमिशन नेटवर्क की है, क्योंकि बड़ी क्षमता होने के बाद भी बिजली को देश के अन्य हिस्सों तक भेजना मुश्किल होता है। इसी वजह से केंद्र सरकार ने नई ट्रांसमिशन लाइंस का काम तेज किया है। मंत्री ने कहा- सुप्रीम कोर्ट में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड वाले मामले की फाइनल सुनवाई हो चुकी है और कुछ शर्तों के साथ ट्रांसमिशन लाइंस के लिए समाधान मिल जाएगा। एनर्जी का सुपर हाईवे राजस्थान से ही निकलेगा
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा- सोलर की सबसे बड़ी कमी है कि इसका समय सीमित होता है। इसलिए देशभर में बड़े स्टोरेज प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। दुनिया का सबसे बड़ा 1680 मेगावॉट पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट हैदराबाद के पास शुरू हो चुका है। स्मार्ट मीटर, आरडीएसएस और लॉस कम करने पर जोर
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बताया- ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में होने वाले नुकसान को कम करने के लिए देशभर में आरडीएसएस पर काम किया गया। कभी 28% तक लॉस रहता था, जो अब 16% पर आ गया है। देश में 4.7 करोड़ स्मार्ट मीटर इंस्टॉल हो चुके हैं। इनमें से 1.90 करोड़ प्रीपेड स्मार्ट मीटर हैं। उन्होंने कहा- प्रीपेड मीटर की सबसे पहले शुरुआत सरकारी विभागों से की जाएगी, ताकि लोगों में भरोसा बने। इससे इसके फायदे सीधे जनता तक पहुंच सकें। लक्ष्य यह है कि देश के हर नागरिक को 24 घंटे बिजली सप्लाई मिल सके।


