केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान कहा-:खेती के लि​ए किसान-वैज्ञानिक व अफसरों की टीम, दोगुनी हो रही किसानों की आय

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेती-किसानी में आ रही समस्या को देखते हुए एक एक्सपर्ट की टीम गठित की जाएगी। इस टीम में किसान,वैज्ञानिक तथा केंद्र और राज्य के अफसर शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश में खेती का स्तर सुधरेगा और धान के बदले दूसरी फसलों में आ रही परेशानी दूर होने किसान आर्थिक रूप से मजबूत होंगे। केंद्रीय मंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि प्रदेश में धान के अलावा फलों और सब्जियों की खेती बेहतर तरीके से की जा रही है। उन्होंने बताया एक्सपर्ट की टीम स्थानीय कृषि जलवायु के अनुसार फसल विविधता और उत्पादकता बढ़ाने की रणनीतियां विकसित करेगी। इसके साथ ही राज्य में एकीकृत कृषि प्रणाली और छोटे किसानों के लिए विविध आय स्रोत बढ़ाने के कार्यक्रम भी लागू किए जाएंगे। चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार कृषि और ग्रामीण विकास के हर पहलू में सक्रिय है। इससे पहले चौहान ने खपरी में किसानों से बातचीत की और आधुनिक कृषि तकनीकों का निरीक्षण किया। जहां किसानों ने उन्हें फल और सब्जियों की उन्नत खेती, पौधों की ग्राफ्टिंग नर्सरी, भाटा पद्धति से टमाटर और शिमला मिर्च की खेती, ड्रैगन फ्रूट, खजूर, ब्लूबेरी और केले की खेती का अवलोकन कराया। उन्होंने बताया कि पारंपरिक फसलों से प्रति एकड़ 35–40 हजार रुपये का लाभ होता है, जबकि आधुनिक बागवानी और उच्च तकनीक अपनाने पर यह लाभ 1–2 लाख रुपये प्रति एकड़ तक बढ़ सकता है। डेढ़ साल में 18.12 लाख पीएम आवास स्वीकृत
चौहान ने बताया कि पीएम आवास योजना के तहत पिछले डेढ़ साल में छत्तीसगढ़ में 18,12,742 घर स्वीकृत और वितरित किए गए हैं। पीएम जीएसवाय के तहत 47,847 किलोमीटर लंबी 10,199 सड़कें और 123 बड़े पुल बनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ‘लखपति दीदी’ योजना तेजी से लागू हो रही है। इसमें 2,76,000 समूहों में 30,68,000 महिलाएं संलग्न हैं और 4,32,000 महिलाएं लघु उद्योगों में सक्रिय हैं। इसके साथ ही महिलाओं को 11,196,16,000 रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया है। दलहन-तिलहन को देंगे बढ़ावा
दरअसल छत्तीसगढ़ में मोटे धान की बजाय दलहन और तिलहन के अलावा दूसरी फसलों पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है। पहले चरण में खाली पड़े खेतों में दलहन उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। मसूर, उड़द, मूंग, अरहर आदि दलहनों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने की तैयारी की जा रही है।

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