प्रदेश के नगरीय निकाय जहां लगातार वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं। वहीं, स्वच्छ भारत मिशन-1 के 700 करोड़ की केंद्रीय ग्रांट लगभग 9 महीने तक अटकी रही। एसबीएम के पहले चरण (2014 -2019) में राज्यों को डोर -टू-डोर कलेक्शन कचरा कलेक्शन, गीला और सूखा कचरा अलग करने और स्टाफ की ट्रेनिंग जैसे मामलों के लिए केंद्र ने फंडिंग दी थी। मप्र के पास बचे हुए 700 करोड़ रुपए पहले पीएफएमएस पोर्टल में पड़े थे, जो मार्च 2025 तक खर्च नहीं हो सके। इसके बाद पोर्टल में बदलाव हुआ। केंद्र ने बेहतर पारदर्शिता और ग्रांट के तेजी तक राज्यों तक पहुंचाने के लिए स्पर्श पोर्टल को 1 अप्रैल से शुरू कर दिया। हालांकि, मप्र में समय से पुराने पोर्टल की बची हुई राशि नए सिस्टम में ट्रांसफर करने के लिए प्रक्रिया नहीं की गई। इससे राशि अटक गई। इसके बाद लगातार किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। हाल ही में केंद्र ने रिमाइंडर भेजकर इस ग्रांट के बारे में याद दिलाया। तब जाकर विभाग में खलबली मची और शासन को प्रस्ताव भेजकर जरूरी अनुमतियां ली गईं, ताकि ग्रांट को नए पोर्टल में ट्रांसफर किया जा सके। हाल ही में प्रक्रिया पूरी करके नए पोर्टल में ग्रांट ट्रांसफर हो चुकी है और जल्द निकायों को जारी की जाएगी। ये होना थे काम एसबीएम के पहले चरण में कचरे के डोर -टू-डोर कलेक्शन, सेग्रीगेशन, कम्पोस्टिंग, स्टाफ की ट्रेनिंग, कचरा खंती में सुधार, सार्वजनिक-सामुदायिक शौचालयों में वित्तीय सहायता जैसी मदों में ग्रांट दी गई थी। इस राशि का उपयोग शहर -कस्बों के स्वच्छता नेटवर्क को बेहतर बनाने में हो सकता था।


