प्रदेश में ठंड का असर तेज होने लगा है। दिसंबर और जनवरी के बीच संभावित शीतलहर को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने राज्यभर में सतर्कता बढ़ा दी है। तापमान में 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट की संभावना को देखते हुए सरकार ने सभी शासकीय और निजी मेडिकल कॉलेजों व अस्पतालों को अलर्ट मोड पर रखा है। किसी भी तरह की लापरवाही न हो, इसके लिए मेडिकल कॉलेजों के डीन, सीएमएचओ और सिविल सर्जन को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। ये निर्देश एनडीएमए (राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन नियंत्रण प्राधिकरण) और भारत सरकार के एनसीडीसी (राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र) की पब्लिक हेल्थ एडवाइजरी के आधार पर तैयार किए गए हैं। शीतलहर के दौरान हाइपोथर्मिया और फ्रॉस्टबाइट (सुन्न होना या छाले) जैसी बीमारियां जानलेवा साबित हो सकती हैं, इसलिए इलाज के साथ-साथ जन-जागरूकता और जोखिम वाले समूहों की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया है। दिन- रात के पारे में 21.1 डिग्री का अंतर, सेहत के लिए गंभीर
भोपाल में बुधवार को दिन का तापमान 26.6 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि रत का तापमान 5.1 डिग्री रहा। यानी- दिन और रात के तापमान में 21.1 डिग्री का अंतर रहा। जेपी अस्पताल के के रिटायर्ड सर्जन एवं विशेषज्ञ डॉ. आरके बड़वे के अनुसार दोनों तापमान में इतना अंतर सेहत के लिए चिंताजनक है। दिन में धूप और रात में ठंडी हवा से त्वचा संक्रमण भी बढ़ सकता है। हाइपोथर्मिया : तेजी से ठंडा होने लगता है शरीर हाइपोथर्मिया एक चिकित्सीय स्थिति है, जिसमें शरीर का तापमान सामान्य स्तर (लगभग 37°0 सेल्सियस) से खतरनाक रूप से कम होकर 350° सेल्सियस या उससे नीचे चला जाता है। यह स्थिति तब होती है, जब शरीर जितनी गर्मी पैदा करता है, उससे अधिक तेजी से गर्मी खोने लगता है। इसमें दिल, दिमाग और अन्य अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा हो सकता है। मेडिकल इमरजेंसी : ऐसी स्थिति, जिसमें व्यक्ति के जीवन, अंगों या स्वास्थ्य पर तुरंत गंभीर खतरा हो और इलाज में थोड़ी लापरवाही जानलेवा सबित हो सकती हो।


