केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भोपाल परिसर में कल से क्षेत्रीय रूपक महोत्सव का शुभारंभ होने जा रहा है। 9 और 10 जनवरी को होने वाले दो दिवसीय महोत्सव में देश भर के संस्कृत महाविद्यालयों के प्रतिनिधि नाट्य दल संस्कृत में लिखे गए लोक जीवन से जुड़े रूपकों की शानदार प्रस्तुतियां देंगे। महोत्सव का उद्घाटन संस्कृत विद्वान आचार्य राधावल्लभ त्रिपाठी के करकमलों से होगा। जबकि आचार्य सदाशिवकुमार द्विवेदी, निदेशक (भारत अध्ययन केंद्र, BHU) और प्रो. नीलाभ तिवारी की उपस्थिति आयोजन को और भी गरिमामय बनाएगी। इस महोत्सव में हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्यप्रदेश और अन्य राज्यों के संस्कृत महाविद्यालयों के छात्रों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले रूपकों में “मंत्रदानम”, “मंजुला”, “महादानम”, “विकसतु एषा कलिका”, “महिमयभारतं” जैसे नाटक शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, ध्रुपद गायन और नाट्यशास्त्र पर आधारित विशेष प्रस्तुतियाँ भी महोत्सव में शामिल की जाएंगी। महोत्सव की अध्यक्षता प्रो. रमाकान्त पाण्डेय, निदेशक भोपाल परिसर करेंगे। कार्यक्रम संयोजक प्रो. कृपाशंकर शर्मा ने कहा कि यह महोत्सव संस्कृत के रूपकों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक एकता को एक सूत्र में पिरोने का एक महत्वपूर्ण कदम है। सांस्कृतिक रूप से समृद्ध इस महोत्सव का आयोजन भारतीय संस्कृति को और प्रगाढ़ बनाने में अहम योगदान देगा और संस्कृत के छात्रों के लिए रोजगार के अवसर भी उत्पन्न करेगा।


