केन-बेतवा की नहर से बुझेगी बुंदेलखंड की प्यास:खेतों और घरों तक पहुंचेगा पानी, पीएम मोदी ने किया शिलान्यास

पानी की कमी से पलायन की मार झेल रहे बुंदेलखंड के किसानों की मुश्किलें अब खत्म होने वाली हैं। केन और बेतवा नदियों को जोड़ने वाली ऐतिहासिक परियोजना से यहां के 10 जिलों को इस समस्या से निजात मिलेगी। यहां के ज्यादातर किसान पानी के अभाव में सिर्फ खरीफ की फसलें ही उगाते हैं। बुधवार को करीब तीन दशक पहले शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी योजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खजुराहो में हरी झंडी दिखा दी है। पीएम ने पन्ना और छतरपुर जिले के सीमावर्ती इलाके में दौधन बांध का शिलान्यास किया। कार्यक्रम में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल, सीएम डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार खटीक, खजुराहो सांसद वीडी शर्मा समेत विधायक-सांसद मौजूद रहे। जानिए, केन-बेतवा परियोजना से कैसे बदलेगा बुंदेलखंड
छतरपुर और पन्ना जिलों की सीमा पर केन नदी पर दौधन बांध बनाया जाएगा। इस बांध के माध्यम से पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र में दो टनल बनाई जाएंगी। एक मुख्य टनल के जरिए 221 किलोमीटर लंबी नहर बनाई जाएगी। यह छतरपुर, झांसी, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों के गांवों से गुजरते हुए झांसी जिले में बेतवा नदी पर बने पारीछा बांध के ऊपरी क्षेत्र में केन नदी का पानी पहुंचाएगी। इस 221 किलोमीटर लंबी नहर के माध्यम से रास्ते में पड़ने वाले गांवों को पीने का पानी उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही प्रेशराइज्ड पाइपलाइन के जरिए खेतों तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचेगा। नहर से सीधे खेत तक पहुंचेगा पानी
केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के तहत बनने वाली नहर से पानी की बर्बादी रोकने के लिए माइक्रो इरिगेशन सिस्टम से सिंचाई की व्यवस्था होगी। राज्य सरकार नहर से पंपों के जरिए प्रेशराइज्ड पाइप डालकर सीधे खेतों तक पानी पहुंचाएगी। चंदेलकालीन तालाब-बावड़ियां भरेंगे
चंदेल राजाओं द्वारा बुंदेलखंड इलाके में तालाबों का निर्माण कराया गया था। पूरे बुंदेलखंड में करीब दो हजार चंदेलकालीन तालाब हैं। इनमें से करीब 500 जलाशय आज भी जीवित अवस्था में हैं। ये सभी तालाब आपस में जोड़े गए थे यानी एक तालाब के भरने के बाद उसके अतिरिक्त जल से अगला तालाब भरता था। इन्हीं जलाशयों के आसपास बावड़ियां भी बनाई गई थीं। केन-बेतवा लिंकेज नहर से चंदेलकालीन तालाब भी पुर्नजीवित हो सकेंगे। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने उठाए सवाल
पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने नदी जोड़ो परियोजना पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने ‘X’ पर लिखा- पर्यावरण और वन को लेकर अपनी ‘कथनी’ और ‘करनी’ में अंतर का प्रधानमंत्री आज एक और सबूत दे रहे हैं। वह जिस केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना का शिलान्यास करने जा रहे हैं, वह मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व के लिए गंभीर खतरा है। योजना से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… 221km लंबी नहर से बेतवा में मिलेगा केन का पानी जलसंकट से जूझते बुंदेलखंड के खेतों में सिंचाई के लिए केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की शुरुआत होने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को खजुराहो में इस रिवर लिंकिंग प्रोजेक्ट का भूमिपूजन करेंगे। 221 किमी लंबी नहर से बेतवा में केन नदी का पानी मिलेगा। इससे मध्यप्रदेश के 44 लाख लोगों के साथ उत्तरप्रदेश के भी 21 लाख लोगों को फायदा मिलेगा। पढ़ें पूरी खबर… 5 नदियों को जोड़ने दो प्रोजेक्ट की शुरुआत इसी महीने नदियों को जोड़ने वाले दो बड़े प्रोजेक्ट्स की शुरुआत इसी महीने से होने जा रही है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में फैले बुंदेलखंड में केन और बेतवा को जोड़ा जाएगा। इस प्रोजेक्ट से एमपी में बुंदेलखंड हिस्से के 10 जिलों को पानी मिलेगा। केन और बेतवा बुंदेलखंड की दो सबसे बड़ी नदियां हैं। दोनों अलग-अलग छोरों पर बहती हैं। यमुना की इन दो सहायक नदियों को एक लिंक कैनाल से जोड़ने की योजना है। पढ़ें पूरी खबर…

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *