केले से घाटा, किसान खीरे की खेती की ओर मुड़े:बुरहानपुर में पॉली हाउस में 80 दिन में 50 टन उत्पादन, 50% अनुदान से बढ़ी आमदनी

बुरहानपुर जिले के किसान केले की फसल में लगातार कम दाम मिलने और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से परेशान हैं। अब वे ककड़ी (खीरा) की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। निंबोला और आसपास के गांवों के करीब सात किसानों ने पॉली हाउस तकनीक का उपयोग कर यह नई खेती शुरू की है। इस पहल की शुरुआत निंबोला के किसान मदन चौधरी ने की। उन्होंने एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर अन्य किसानों को जोड़ा। अब तक कुल सात किसान ककड़ी की खेती में शामिल हो चुके हैं। चौधरी ने बताया कि वे 20 साल से केले की खेती कर रहे थे, लेकिन दाम लगातार गिर रहे थे, कुछ महीने पहले तो यह 3 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए थे। किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान मिलता है
केले की खेती में हो रहे नुकसान को देखते हुए चौधरी ने वैकल्पिक खेती का मन बनाया। उनका ध्यान केंद्र सरकार की ‘प्रोटेक्टिव खेती’ योजना पर गया। नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड, नई दिल्ली द्वारा संचालित इस योजना के तहत किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान मिलता है। मदन चौधरी ने दो एकड़ का नेट स्वीकृत कराया और अपने खेत में पॉली हाउस स्थापित किया। उन्होंने 5 नवंबर को खीरे की फसल लगाई। तीन महीने में उन्हें 50 टन का उत्पादन मिला, जबकि 30 से 35 टन उत्पादन और होने की उम्मीद है। बाजार में खीरे के दाम 20 से 30 रुपये प्रति किलो मिल रहे हैं। 80 दिनों की फसल में ही 50 टन उत्पादन
चौधरी के अनुसार, खीरे की फसल में खराबी भी नहीं आती है। 80 से 85 दिनों की फसल में ही 50 टन उत्पादन हो गया। इस खेती में खाद भी कम लगती है और रासायनिक पेस्टीसाइड का छिड़काव भी नहीं करना पड़ता। पानी की भी बचत होती है। किसान दो एकड़ में ही इतनी कमाई कर लेते हैं कि उन्हें दूसरी खेती करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। फिलहाल, सात किसान मिलकर 10 से 12 एकड़ में पॉली हाउस बनाकर खीरे की खेती कर रहे हैं। इस खीरे की गुणवत्ता आयातित किस्मों जैसी है, हालांकि अभी इसे स्थानीय बाजारों में बेचा जा रहा है। चौधरी ने अन्य किसानों को भी इस योजना का लाभ उठाने की सलाह दी है।

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