केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी उद्यान इन दिनाें परदेशी पक्षियों से आबाद है। विशेष कर यूरेशिया से आए पिन टेल से। करीब 3500 किलोमीटर की दूरी तय कर करीब 2 हजार से ज्यादा की संख्या में पिन टेल घना में आए हैं, जाे अपनी खूबसूरती और फीडिंग की स्टाइल से सैलानियाें काे लुभा रहे हैं। ऐसी स्थिति करीब 10 साल बाद आई है। डीएफओ मानससिंह ने बताया कि कई साल बाद इतनी बड़ी संख्या में पिन टेल आए हैं। इसकी बड़ी वजह घना की झीलाें में पानी भरा हाेना है। करीब 9 वर्ग किलोमीटर में फैली झीलाें में इस साल 640 एमसीएफटी पानी पांचना और गाेवर्धन ड्रेन से मिला। भूरे रंग की डक की पूंछ पिन जैसी हाेती है, इसलिए कहा जाता है पिनटेल पिनटेल का प्रवास सर्दी पर निर्भर करता है। इस बार सर्दी देरी से प्रारंभ हुई, इसलिए दिसंबर में पिन टेल का आना प्रारंभ हुआ। पिन टेल फरवरी तक भरतपुर में प्रवास करेंगी। भूरे रंग की डक की पूंछ पिन जैसी हाेती है।


