केसीसी बैंक विवाद में ED की एंट्री:केंद्रीय जांच एजेंसी का बैंक को नोटिस; होटल के 24 करोड़ लोन सेटलमेंट मामले में कसेगा शिकंजा

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक (KCC)विवाद में प्रवर्तन निदेशालय ( ED) की एंट्री हो गई है। ED ने कांगड़ा के आरएस बेल्वेडरे होटल को 45 करोड़ रुपए लोन देने के मामले में सहकारी बैंक को नोटिस जारी किया है। केंद्रीय एजेंसी ने लोन देने और आधे से अधिक के लोन सेटलमेंट से संबंधित दस्तावेज मांगे हैं। इससे, आगामी दिनों में बैंक प्रबंधन पर भी शिकंजा कसते नजर आ रहा है। बता दें कि सरकारी बैंक ने आरएस बेल्वेडरे होटल को 45 करोड़ रुपए लोन दिया था। बैंक ने जब लोन नहीं चुकाया तो मात्र 21 करोड़ रुपए में सेटल कर दिया और बैंक प्रबंधन ने 24 करोड़ रुपए की राशि माफ कर दी। होटल का यह लोन साल 2016 में एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) हो गया था। इसके बाद, बैंक ने नोटिस जारी कर संपत्ति पर कब्जा लेने की कार्रवाई शुरू की। बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार, बैंक को होटल की संपत्ति की नीलामी करनी चाहिए थी। ओपन बोली में बैंक को अच्छी कीमत मिल सकती थी। मगर बैंक प्रबंधन ने ऐसा नहीं किया। सूत्रों का कहना है कि यह होटल अब कांगड़ा के एक प्रभावशाली नेता से जुड़े लोगों के पास है। आरोप है कि यह सेटलमेंट राजनीतिक दबाव में किया गया। इससे बैंक को 24 करोड़ रुपए का झेलना पड़ा। बैंक की साख पर सवाल होटल के लोन सेटलमेंट मामले ने बैंक की साख पर सवाल खड़े किए हैं। अमूमन यह देखने में आता है कि आम जनता यदि छोटे अमाउंट के लोग को नहीं चुका पाती तो उन पर सख्त कार्रवाई की जाती है और संपत्ति को कुर्क कर दिया जाता है। वहीं 45 करोड़ के लोन मामले में बैंक की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। 24 करोड़ लोन सेटलमेंट को लेकर जनता पूछ रही ये सवाल बैंक के प्रबंधन निदेशक ने नोटिस की पुष्टि की कांगड़ा सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक संदीप कुमार ने ED नोटिस मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा- ED ने पालमपुर होटल से जुड़े OTS मामले से संबंधित सभी दस्तावेज़ मांगे हैं, जो उन्हें उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा- बैंक ने पूरी कार्रवाई नियमों के तहत की है। उन्होंने बैंक के ग्राहकों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील करते हुए आश्वस्त किया कि बैंक की पूंजी और इन्फ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह सुरक्षित है। सरकार ने BOD को भंग किया KCC के निदेशक मंडल (BOD) को राज्य सरकार ने बीते 12 सितंबर को निलंबित कर दिया था। बिगड़ती प्रशासनिक स्थिति, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) और नाबार्ड के कानूनी दिशा-निर्देशों की अनदेखी पर रजिस्टार को-ऑपरेटिव सोसाइटी ने यह कार्रवाई की है और मंडलायुक्त कांगड़ा विनोद कुमार को प्रशासक नियुक्त किया।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *