कैबिनेट आज:9 साल बाद नई स्टार्टअप नीति लाने जा रही सरकार

छत्तीसगढ़ में नौ साल बाद नवाचार के लिए नई स्टार्टअप नीति जारी होने जा रही है। इस आज कैबिनेट की मुहर लग जाएगी। नीति के अनुसार अब नए स्टार्टअप की शुरुआत करने वालों को 70 प्रतिशत से अधिक का ब्याज अनुदान देने की तैयारी है। यानी अगर कोई स्टार्टअप शुरू करता है तो वह जो भी बैंक से लोन लेगा उसके ब्याज की 70 प्रतिशत राशि पांच साल तक सरकार देगी। यही नहीं प्रोजेक्ट रिपोर्ट अगर पसंद आती है तो उसके बनाने पर जितना खर्च आया है, उस पर 50 प्रतिशत का अनुदान दिया जाएगा। वहीं निजी इन्क्यूबेटर बनाने पर भी सरकार ढ़ाई करोड़ रुपए से अधिक की सहायता प्रदान करेगी। उद्योग विभाग पिछले एक साल से इस नीति पर काम कर रहा था। आज कैबिनेट में अनुदान की राशिओं पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यह नीति 2029 तक लागू रहेगी। कांग्रेस सरकार नीति लाना ही भूली पहली बार 2017 में रमन सरकार ने नवाचार उद्यमिता विकास नीति 2015-2019 बनाई थी। यह नीति अक्टूबर 2019 में समाप्त हो गई। इसके बाद भूपेश सरकार आई लेकिन वह नई नीति बनाना ही भूल गई। तब से लेकर आज तक प्रदेश में बिना किसी नीति के ही स्टार्टअप चल रहे थे। इसका खामियाजा यह हुआ कि इन्कयूबेशन सेंटर केवल को-वर्किंग स्पेस बनकर रह गए। न तो वहां कोई मेंटर है और न नए स्टार्ट अप को कोई सपोर्ट किया जाता है। इस वजह से 9 साल में करीब 700 स्टार्टअप दूसरे राज्यों में शिफ्ट हो गए हैं। पहला इन्कयूबेशन सेंटर बंद प्रदेश का पहला और उस दौर का देश का दूसरा सबसे बड़ा इन्कयूबेशन सेंटर 36 आईएनसी नीति न होने की वजह से बंद हो गया। 200 सीट का यह सेंटर बनाया गया था। जब इसकी शुरुआत हुई थी तो हर साल नए बैच लिए जाते थे। इसमें 127 स्टार्टअप ने रजिस्ट्रेशन कराया था। लेकिन सुविधाओं के अभाव में धीरे-धीरे कर सब पलायन करते चले गए। 2025 में 50 प्रतिशत स्टार्टअप यहां से जा चुके थे। इस दौरान सिटी सेंटर मॉल का किराया न देेने पाने की वजह से सरकार ने इसे बंद कर दिया। 10 लाख की सीड मनी मिलेगी छत्तीसगढ़ से स्टार्टअप छोड़कर दूसरे राज्यों में जा रहे थे। अब इन्हें रोकने के लिए नीति में 10 लाख रुपए की सीड मनी का प्रावधान भी रखा गया है। यानी अगर किसी का आइडिया इन्क्यूबेटर को पसंद आता है तो वह 10 लाख रुपए की टुकड़ों-टुकड़ों में मदद करेगा। पहली किश्त पंजीयन करते ही दी जाएगी। जिससे वह आइडिया को जमीन पर ला सके। यही नहीं इन्क्यूबेशन सेंटर बाजार उपलब्ध कराने से लेकर बनाने तक में भी मदद करेगा। ऐसा बेंगलुरु, हैदराबाद जैसे शहरों में होता है।
प्रजेंटेशन देने पर भी मदद पहली बार छत्तीसगढ़ में नए आइडिया को बढ़ावा देने के लिए उनके प्रजेंटेशन तक पर सहयोग राशि देने की तैयारी है। नीति में यह भी तय किया गया है कि अगर कोई स्टार्टअप प्रजेंटेशन देने दूसरे प्रदेश या देश के किसी बड़े प्लेटफार्म पर जाता है तो उसके आने-जाने का खर्च सरकार देगी। साथ ही उसे कुछ सहयोग राशि भी दी जाएगी। जिससे छत्तीसगढ़ का नाम विश्व स्तर तक पहुंचे। स्टार्टअप में सबसे नीचे छत्तीसगढ़ स्टार्टअप रैंकिंग फ्रेमवर्क के इमर्जिंग कैटेगरी में छत्तीसगढ़ राज्य सबसे नीचे पायदान पर है। इस कैटेगरी में उन्हें रखा जाता है जहां ईको सिस्टम पनप रहा हो। 2018 में छत्तीसगढ़ इस कैटेगरी में लीडर था। लेकिन नीति न होने की वजह से स्तर दिन ब दिन गिरता चला गया। हर जिले में इन्क्यूबेशन सेंटर बनाए तो गए लेकिन वह सिर्फ के नाम के रहे। जैसे जगदलपुर में थिंक बस्तर, बिलासपुर में बी-इंक्यूब आदि। बता दें कि हर साल केंद्र सरकार स्टार्टअप की कई कैटेगरी रैंकिंग जारी करती है। युवाओं को स्टार्टअप के लिए बेहतर माहौल और अच्छा प्लेटफार्म देने के लिए नई स्टार्टअप नीति पर उद्योग विभाग काम कर रहा है। जल्द ही इसे लागू किया जाएगा। राज्य में स्टार्टअप बढ़ेंगे। -लखनलाल देवांगन, उद्योग मंत्री

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *