मिथिलेश सिंह | गिरिडीह जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, गिरिडीह ने उपभोक्ताओं के हित में एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। वी-मार्ट को एक उपभोक्ता से बैग के लिए 5 रुपया अवैध रूप से वसूलने के आरोप में दोषी करार दिया। आयोग ने वी-मार्ट को 5 रुपए की राशि ब्याज सहित लौटाने के साथ 20,000 मानसिक उत्पीड़न व सेवा में कमी के लिए और 12,500 मुकदमा में खर्च के रूप में अदा करने का आदेश दिया है। यह फैसला न केवल शिकायतकर्ता के लिए राहतकारी रहा, बल्कि उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा में भी एक महत्वपूर्ण निर्णय है। फैसला 25 मार्च को आया है। केस शहरी क्षेत्र के चिरइयांघाट निवासी सृष्टि सोम्या ने उपभोक्ता आयोग, गिरिडीह में किया था। जिसका वाद संख्या 22-2019 है। आरोप था कि उन्होंने 6 मई 2019 को गिरिडीह शहर के कालीबाड़ी चौक के मकतपुर रोड स्थित वी-मार्ट गिरिडीह से 1,284 रुपए की खरीदारी की थी। सामान सौंपते समय दुकान ने एक प्रिंटेड कैरी बैग के लिए उनसे 5 रुपए वसूले। जिस पर वी-मार्ट का लोगो और प्रचार पंक्तियां छपी थी। इसे जबरन प्रचार का माध्यम बनाना बताया और इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के विरुद्ध माना। उपभोक्ता से प्रचार सामग्री युक्त बैग के लिए शुल्क वसूलना अनुचित शिकायतकर्ता के अधिवक्ता राजीव कुमार सिन्हा और विजय कुमार ने अदालत में दलील दी कि उपभोक्ता से प्रचार सामग्री युक्त बैग के लिए शुल्क वसूलना न केवल अनुचित व्यापार प्रथा है, बल्कि मानसिक उत्पीड़न भी है। वी-मार्ट के अधिवक्ता पंकज कुमार ने अपने पक्ष में तर्क दिया कि पर्यावरण संरक्षण के तहत प्लास्टिक बैग मुफ्त नहीं दिए जा सकते और बैग लेना उपभोक्ता की इच्छा पर निर्भर था।


