कैलारस शक्कर कारखाने की नहीं हुई नीलामी:कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय काली पट्टी बांधकर भूख हड़ताल पर बैठे

मुरैना के कैलारस शक्कर कारखाने की नीलामी में भाग लेने कोई नहीं आया, जिसकी वजह से नीलामी प्रक्रिया खत्म हो चुकी है। यह पांचवीं बार नीलामी हुई थी, इस बार भी किसी भी प्रतिभागी ने नीलामी में भाग नहीं लिया। दूसरी तरफ नीलामी के विरोध में जौरा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय भूख हड़ताल पर बैठ हैं। धरने पर बैठे सभी लोगों ने काली पट्टी बांध रखी थी। बता दें कि, पिछली बार 21 जनवरी 2025 को नीलामी हुई थी। नीलामी प्रक्रिया में चार प्रतिभागियों ने भाग लिया था। इस दिन विधायक पंकज उपाध्याय के नेतृत्व में हजारों की संख्या में कांग्रेसियों व ग्रामीणों ने इसका विरोध किया था। नीलामी में जो प्रतिभागी वहां पर आए थे, उन्होंने अपने नाम वापस ले लिए और नीलामी में भाग नहीं लिया। सुबह से चल रहा है धरना प्रदर्शन शक्कर कारखाने की नीलामी के विरोध में सुबह 10 बजे से ही विधायक पंकज उपाध्याय धरने पर बैठ गए थे। उनके साथ में कांग्रेस कार्यकर्ता व ग्रामीण भी धरने पर बैठे हुए हैं। वह कैलारस के शक्कर कारखाने के बगल में टेंट लगाकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। पंकज उपाध्याय का कहना है कि अगर नीलामी होती है तो वह अपनी भूख हड़ताल नहीं तोड़ेंगे। अगर नीलामी में किसी ने भाग नहीं लिया तो वह एक दिन भूख हड़ताल पर रहेंगे। 2 करोड़ 60 लाख 22 हजार से शुरू होनी थी नीलामी कैलारस तहसीलदार विश्राम सिंह बघेल ने बताया कि नीलामी की शुरुआत की राशि 2 करोड़ 60 लाख 22 हजार रुपए है। नीलामी की पंजीयन राशि 1 लाख रुपए है। नीलामी की शर्त यह है कि अगर किसी ने पंजीयन कराने के बाद अगर अपना नाम वापस ले लिया तो उसकी 1 लाख रुपए की राशि जब्त कर ली जाएगी। डेढ़ करोड़ रुपए देना है 59 बकायदारों को कैलारस शक्कर कारखाने की नीलामी हाई कोर्ट के आदेश पर की जा रही है। शक्कर कारखाना बंद होने के बाद इसके 59 कर्मचारी अपनी देनदारियों को लेकर न्यायालय की शरण में चले गए थे। न्यायालय ने मुरैना जिला प्रशासन को आदेश दिया था कि शक्कर कारखाने की चार बीघा जमीन बेचकर इन श्रमिकों का भुगतान किया जाए। न्यायालय के आदेश पर जिला प्रशासन ने नीलामी की प्रक्रिया शुरू कराई, जिसमें शुक्रवार, 7 फरवरी 2025 तक पांच बार नीलामी प्रक्रिया की गई, जिसमें केवल पिछली बार 21 जनवरी को चार प्रतिभागियों ने भाग लिया था। बाकी की नीलामी प्रक्रिया में किसी भी प्रतिभागी ने भाग नहीं लिया। अब प्रशासन पांच बार नीलामी कराने के बाद इस नतीजे पर पहुंच चुका है कि कोई भी व्यक्ति इस शक्कर कारखाने की जमीन को लेने के लिए तैयार नहीं है। कांग्रेस विधायक बोले- नीलामी नहीं हुई तो जारी रहेगी भूख हड़ताल मुरैना के जौरा से कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने कहा कि हम नीलामी प्रक्रिया के विरोध में भूख हड़ताल पर बैठे हैं। अगर नीलामी होती है तो हम निरंतर भूख हड़ताल पर बैठे रहेंगे। पिछली बार नहीं हो पाई थी नीलामी इससे पहले 21 जनवरी को नीलामी होने वाली थी, लेकिन लोगों ने सत्याग्रह और जेल भरो आंदोलन किया गया था, जिससे उस दिन नीलामी रुक गई थी। प्रदर्शनकारियों को उम्मीद थी कि प्रशासन नीलामी को रोक सकता है, लेकिन सरकार नीलामी पर अडिग है। स्थानीय लोग और किसान इस नीलामी को उनके भविष्य के लिए खतरनाक मानते हैं, और उनका कहना है कि इससे हजारों किसानों और मजदूरों की आजीविका पर संकट आ जाएगा। इसलिए हो रहा है विरोध कैलारस शक्कर कारखाने की शुरुआत 1972 में हुई थी। इस दौरान यहां 1200 कर्मचारी कार्यरत थे और 5 हजार किसान गन्ना का उत्पादन करते थे। इस कारण क्षेत्र के बेरोजगारों को नौकरी के लिए भटकना नहीं पड़ता था। वहीं किसान भी गन्ने की फसल को कारखाने में ही बेच देते थे, जिससे आमदनी हो जाती थी। युवाओं का कहना है कि अगर इस कंपनी की भूमि की नीलामी हो जाती है तो यहां पर कभी रोजगार का साधन उपलब्ध नहीं हो पाएगा। सरकार को चाहिए कि वह इस बंद पड़े शक्कर कारखाने को शुरू करे। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और किसान भी अपनी उपज को बेच सकते हैं।

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